- एनआईवीएच में छात्राओं से छेड़छाड़ का मामला

- संगीत शिक्षक को सस्पेंड कर यौन शोषण का केस दर्ज करने के आदेश

- आईएएस पांडियन को जांच अधिकारी नियुक्त कर मांगी तीन दिन में रिपोर्ट

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नैनीताल : नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर विजुअली हैंडीकैप्ड (एनआईवीएच) में छात्राओं से छेड़छाड़ व यौन शोषण मामले को हाई कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है. हाई कोर्ट ने इस मामले में संस्थान के संगीत शिक्षक को सस्पेंड करने व उसके खिलाफ यौन शोषण का केस दर्ज करने का आदेश पारित किया है. साथ ही संस्थान में 12 घंटे के भीतर स्थायी चिकित्सक की नियुक्ति करने के निर्देश डीएम को दिए हैं.

कोर्ट ने लिया स्वत संज्ञान

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने मीडिया में प्रकाशित खबरों का स्वत: संज्ञान लेते हुए ये आदेश जारी किए हैं. साथ ही इन दी संस्थान में छात्राओं के सेक्सुअल हरासमेंट और मॉलिस्टेशन की जनहित याचिका कोर्ट में दायर की गई थी. इसमें कहा गया था कि संगीत शिक्षक द्वारा छात्राओं के साथ छेड़छाड़ और शारीरिक शोषण किया गया.

2 महिला दरोगा, 2 सिपाहियों की तैनाती के आदेश

बुधवार को मामले में सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने पावर कॉरपोरेशन को संस्थान में 48 घंटे के भीतर तत्काल बिजली व्यवस्था ठीक करने, एक जनरेटर लगाने, एसएसपी देहरादून से संस्थान में दो महिला दारोगा व दो सिपाहियों की तैनाती करने के निर्देश दिए. कोर्ट ने संस्थान में दो महिला सदस्यों की नियुक्ति करने को कहा है, जो बच्चों को सांस्कृतिक कार्यक्रम सिखाने के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभाग कराएंगे. खंडपीठ ने इस मामले में सीनियर आईएएस सेंथिल पांडियन को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए तीन दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने, एक माह में स्टूडेंट्स के मनोरंजन के लिए खेल मैदान मंजूर करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने इस मामले में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष ललित बेलवाल को न्यायमित्र नियुक्त किया है. इसके अलावा संस्थान में सात दिन के भीतर नियमित निदेशक की नियुक्ति का आदेश भी पारित किया है. इस मामले में अगली सुनवाई चार सितंबर नियत की गई है.