क्कन्ञ्जहृन् : इसके लिए ही कोर्ट ने 8 नवंबर तक राज्य सरकार से स्थिति बताने के लिए कहा है। मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन एवं न्यायाधीश डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ नेअखबार में प्रकाशित समाचार के आधार पर संज्ञान लिया है। अंग्रेजी अखबार में बताया गया था कि डेंगू प्रदेश में विकराल रूप धारण करता जा रहा है। उस हिसाब से राज्य सरकार के प्रबंध पर्याप्त नहीं हैं। खून एवं प्लेटलेट्स की कमी है।

10 लाख यूनिट ब्‍लड की जरूरत

खबर में बताया गया कि करीब एक हजार मरीजों की जांच की गई तो उसमें से पांच सौ लोग डेंगू प्रभावित पाए गए। इन स्थितियों में बिहार में करीब 10 लाख यूनिट ?लड की जरूरत है। वहीं ?लड बैंकों में केवल 1.3 लाख यूनिट ?लड ही है। खंडपीठ ने इस खबर को लोकहित याचिका की संज्ञा देते हुए स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव एवं नगर विकास विकास विभाग के प्रधान सचिव को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया। मामले में सहयोग करने के लिए अधिवक्ता दीनू कुमार को नियुक्त किया गया है।

आम लोग कैसे करेंगे बचाव

खंडपीठ को जानकारी दी गई कि पटना में किस प्रकार से डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। उन्होंने बताया कि डेंगू के प्रकोप से एक पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मुद्रिका यादव की मृत्यु हो चुकी है। आम लोग इस बीमारी से किस प्रकार से बचाव करेंगे। सरकारी अस्पतालों का हाल खराब है। जबकि प्राइवेट नर्सिग होम में कितने प्लेटलेट्स हैं, इसका कोई आंकड़ा नहीं है। अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि मच्छरों से बचाव के लिए नियमित रूप से फॉगिंग नहीं हो पा रहा है।