- सरकार की सुस्ती के कारण एक प्रतिष्ठित संस्थान को राज्य से बाहर ले जाया जा सकता है: हाई कोर्ट

NAINITAL: पौड़ी गढ़वाल में स्थित श्रीनगर एनआईटी शिफ्टिंग मामले में सरकार की उदासीनता पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है। हाई कोर्ट ने एनआइटी के स्थायी परिसर निर्माण व उसे अन्यत्र शिफ्ट करने के मामले में चार स्थान चिह्नित करने संबंधी आदेश का अनुपालन नहीं करने पर राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि सरकार की सुस्ती के कारण एक प्रतिष्ठित संस्थान को राज्य से बाहर ले जाया जा सकता है। यह मामला राजनीति और अफसरशाही के हाथों की कठपुतली बन गया है।

जनहित याचिका में हुई सुनवाई

थर्सडे को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ में श्रीनगर गढ़वाल एनआईटी के पूर्व छात्र जसबीर सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। खंडपीठ ने 27 मार्च को पहाड़ अथवा मैदान कहीं भी एनआईटी परिसर के लिए चार स्थान चिह्नित कर कोर्ट को बताने संबंधी आदेश का अनुपालन नहीं करने को अवमानना करार दिया। साथ ही याचिकाकर्ता से इस मामले में कार्रवाई करने को कहा। कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। खंडपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि यह मामला राजनीति व ब्यूरोक्रेट की हाथ की कठपुतली बन गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार आइआईटी रुड़की व केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा आपत्ति जताई गई थी। कोर्ट इस मामले में महाधिवक्ता के बयान से भी संतुष्ट नहीं हुआ। जिसमें कहा कि अभी तक छात्रों का एडमिशन क्लीयर नहीं है। दो रिपोर्ट में वहां निर्माण को भूगर्भीय दृष्टि से उचित करार नहीं दिया गया है। यहां उल्लेखनीय है कि श्रीनगर(पौड़ी गढ़वाल) के सुमाड़ी में एनआईटी के लिए ग्रामीणों द्वारा जमीन दान में दी गई है। मगर अब तक निर्माण शुरू नहीं हो सका है।