क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : रांची-जमशेदपुर फोरलेन सड़क निर्माण में वित्तीय गड़बड़ी की जांच अब सीबीआइ करेगी. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस एके चौधरी की कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में सीबीआइ को प्रारंभिक जांच शुरू करने का निर्देश दिया है. सीबीआइ को तीन माह में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करना है. कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि उक्त सड़क निर्माण का मामला जनहित से जुड़ा है इसलिए कोर्ट इसे असीमित समय के लिए नहीं छोड़ सकती है. इस सड़क के निर्माण का कार्य पूरा होना चाहिए.

जनहित से जुड़ा मामला

बुधवार को सीबीआइ की ओर से बताया गया कि कोर्ट के आदेश और जनहित का मामला देखते हुए वह इस मामले की जांच के लिए तैयार है. सीबीआइ के वकील ने कोर्ट से कहा कि इस मामले में प्रारंभिक जांच की अनुमति दी जाए. साथ ही एसएफआइओ, एनएचएआइ, बैंक से भी सहयोग की जरूरत होगी. इस पर कोर्ट ने प्रारंभिक जांच और सभी पक्षों को सहयोग करने का निर्देश दिया.

सभी दस्तावेज सीबीआई को सौंपे

कोर्ट ने केंद्र सरकार की एजेंसी सीरियस फ्राड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआइओ) को मामले से संबंधित सभी दस्तावेज सीबीआइ को सौंपने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को भी जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया. नौ जुलाई को हाई कोर्ट ने मामले में सीबीआइ को प्रतिवादी बनाते हुए यह बताने को कहा था कि सड़क निर्माण में वित्तीय गड़बड़ी की वह जांच करेगी या नहीं.

संवेदक को बर्खास्त करने की दें अनुमति

सुनवाई के दौरान एनएचएआइ की ओर से कोर्ट में आवेदन देकर सड़क निर्माण करने वाली रांची एक्सप्रेस वे कंपनी को बर्खास्त करने की अनुमति मांगी गई. एनएचएआइ ने कोर्ट से कहा कि उन्हें बिना औपचारिकता पूरी किए ही संवेदक को बर्खास्त करने की अनुमित दी जाए. इसपर संवेदक और बैंक ने विरोध जताया और जवाब दाखिल करने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. नौ अगस्त तक दोनों पक्षों को जवाब दाखिल करना है.