राम प्रसाद बिस्मिल समेत कई महापुरुषों की जन्मतिथियों में गड़बड़ी

सरकारी स्कूल की कक्षा 6 और कक्षा 7 की किताबों में गलतियों की भरमार

>Meerut. बेसिक शिक्षा परिषद की सरकारी किताबों में पढ़ाई जा रही महापुरुषों की जीवनी में किसी का जन्म दिवस बदल दिया गया है तो किसी का जन्म सालों आगे या पीछे कर दिया गया है. साल पूरा होने के बाद भी किताब में संशोधन नहीं हुआ है और बच्चों को यही ज्ञान देकर गुमराह किया जा रहा है. कक्षा 6 और 7 की हिंदी की किताब मंजरी पर नजर डालें तो स्थिति खुद ही स्पष्ट हो जाती है और अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश की भावी पीढ़ी किस तरह की शिक्षा ग्रहण कर रही है.

कई जगह गड़बड़ी

बेसिक शिक्षा परिषद की कक्षा 6 की किताब में पेज संख्या 85 गोपाल दास नीरज का संक्षेप परिचय दिया हुआ है. इसमें इनका जन्म 8 फरवरी 1926 प्रकाशित किया गया है, लेकिन इनका वास्तविक जन्म 4 जनवरी 1925 को हुआ था. इसके अलावा पेज संख्या 28 पर राम प्रसाद बिस्मिल का जन्मदिवस भी गलत छपा हुआ है. इनका जन्म 11 जून 1897 को हुआ था लेकिन किताब में 4 जून 1897 पढ़ाया जा रहा है. वहीं पेज संख्या 104 देखें तो इसमें भवानी प्रसाद मिश्र का जन्मपरिचय दिया गया है, जिसमें इनका जन्म 29 मार्च 1914 पढ़ाया जा रहा है, लेकिन इनका जन्म 1913 में हुआ था. वहीं कक्षा 7 की हिंदी की किताब मंजरी पर गौर करें तो पेज संख्या 50 पर वैद्यनाथ मिश्रा नागार्जुन का जन्म सन् 1910 में होना पढ़ाया जा रहा जबकि उनका जन्म 30 जून 1911 को हुआ था.

पहले भी मिलीं गलतियां

बेसिक शिक्षा परिषद में इतिहास को बदलकर पढाया जाना नई बात नहीं है. इससे पहले भी इन किताबों में कई गलतियां मिल चुकी हैं. कक्षा 6 की किताब मंजरी में कन्हैया लाल मिश्र की जन्मतिथि में झोल मिल चुका है इसके अलावा तुलसीदास और सूरदास के जन्मस्थान भी अलग-अलग छापा गया है. कक्षा पांच की कलरव में तुलसी दास का जन्म बांदा जिले में 1532 में होना बताया था वहीं कक्षा 7 की मंजरी में यह 1511 में सोरों में होना बताया गया है. इसी प्रकार सूरदास के की मृत्यु भी 1580 के बजाए 1585 ईसवी छपी है. इसके अलावा कक्षा-5 की हमारा परिवेश में भी गलतियों की भरमार है. हैरानी की बात यह है कि पूरा सत्र बीतने के बाद भी शिक्षक बच्चों की यही ज्ञान रटा रहे हैं. इस ओर न तो परिषद की नजर पड़ी न ही शिक्षकों ने इसे लेकर कोई आपत्ति दर्ज की है.

ये है सिस्टम

बेसिक शिक्षा परिषद की ये किताबें 2017-18 में प्रकाशित हुई और 2018-19 में इन्हें संशोधित भी किया गया. वहीं इस किताब को करीब 18 लेखकों ने लिखा है और 6 लोगों की टीम ने सम्पादित भी किया है. जिसमें एनसीईआरटीई के रीडर, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के प्रो. और रिटायर्ड प्रिंसिपल शामिल हैं. पाठ्य पुस्तक तय होने के बाद स्क्रीनिंग कमेटी चेक करके गलतियां भी सुधारती है. प्रेस में छपने के बाद भाषा समिति प्रूफ रीडिंग कराती है और फिर पुस्तक को उपलब्ध कराया जाता है.

किताबों में गलतियों की जो सूचना पहले मिली थी, उन्हें ठीक करवा दिया गया था. ऐसी गलतियों के बारे में जानकारी नहीं मिली है. अगर ऐसा है तो हम मुख्यालय पत्र भेजकर संशोधन के लिए कहेंगे.

सतेंद्र कुमार ढाका, बीएसए, मेरठ.