-आज भी नहीं कंप्लीट हो सका है एक्स्ट्रो टर्फ काम

-छह करोड़ की लागत से स्पो‌र्ट्स हॉस्टल में बनाया जा रहा है एस्ट्रोटर्फ

-कई बार चेतावनी के बाद भी कंप्लीट नहीं हो सका है काम

GORAKHPUR: हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की आज जयंती है. प्यार से दद्दा पुकारे जाने वाले हॉकी के इस जादूगर का फेवरेट स्पो‌र्ट्स यानी हॉकी शहर में अब भी अपग्रेडेशन का इंतजार कर रहा है. सुविधाएं नाम पर सिर्फ खेल के मैदान हैं, तो वहीं कई सालों से एस्ट्रोटर्फ पर खेलने की राह देख रहे खिलाडि़यों को अब भी इस पर खेलने का इंतजार है. टर्फ लगाने का काम तो कंप्लीट हो चुका है, लेकिन अब भी साइड फ्लोरिंग कंप्लीट न होने से इसका इनॉगरेशन नहीं हो सका है. जिम्मेदारों की मानें तो नेक्स्ट मंथ इसके कंप्लीट होने की उम्मीद है, जिसके बाद एस्ट्रोटर्फ बनकर तैयार होगा और फिर इस पर हॉकी की जादूगरी दिखेगी.

दिसंबर 2015 में मिली थी सौगात

वीर बहादुर सिंह स्पो‌र्ट्स कॉलेज में एस्ट्रोटर्फ की सौगात दिसंबर 2015 में ही मिली थी. तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड के लिए पहले 5.59 करोड़ रुपए फंड अलॉट किया. बाद में इसकी लागत बढ़ गई और टोटल बजट 694.55 लाख हो गया. यहां का निर्माण कार्य शुरू हो गया. कुछ दिन चलने के बाद इसमें पेंच फंस और मामला पेंडिंग पड़ना शुरू हो गया. कई बार जिम्मेदारों ने इस मामले में निरीक्षण किया और काम में ढुलमुल रवैये पर फटकार लगाई, मगर इसके बाद भी सूरत नहीं बदल सकी. अप्रैल 2017 में गोरखपुर पहुंचे स्पो‌र्ट्स डायरेक्टर ने कड़ी फटकार लगाते हुए जुलाई तक काम पूरा कराने के निर्देश दिए थे, मगर डेडलाइन बीतने के बाद भी अब तक टर्फ लगाने का काम पूरा नहीं हाे सका है.

खराब हुई टर्फ तो हॉलैंड से पहुंचे इंजीनियर

काम में सुस्ती और कई माह खुले में टर्फ पड़ा होने की वजह से काफी दिक्कतें आ गई हैं, एस्ट्रोटर्फ के कई हिस्से फूल गए, जिसे बिछाने के बाद भी कमी नहीं दूर हो सकी. एस्ट्रोटर्फ मैदान का काम पूरा होने के बाद डीएम राजीव रौतेला ने 19 जनवरी 2018 को उसका निरीक्षण किया था. इस दौरान टर्फ में सिकुड़न देखकर उन्होंने उसे ठीक कराने के निर्देश दिए थे. खास हॉलैंड से इंपोर्ट किए टर्फ की जब शिकायत की गई, तो कंपनी ने अपने खर्च पर इसे बदलने के लिए सहमति दे दी, जिसके बाद इसको बदलने के लिए न सिर्फ हॉलैंड से टर्फ आया, बल्कि वहां से इंजीनियर भी यहां पहुंचे और उसे सही तरीके से पेस्ट कर वापस लौट गए.

अभी सिर्फ हॉस्टलर्स को फायदा

गोरखपुर हॉकी का सबसे बड़ा हब रहा है. यहां से दर्जनों प्लेयर्स ने टीम इंडिया में जगह बनाने में कामयाबी हासिल की है. एस्ट्रोटर्फ मिलने के बाद हॉकी की यह नर्सरी और फले-फूलेगी. इसके बाद जहां गोरखपुर में भी स्टेट और नेशनल लेवल के मैचेज हो सकेंगे. वहीं गोरखपुर के खिलाडि़यों को भी यह मौका मिलेगा कि एस्ट्रोटर्फ पर किस तरह से हॉकी खेली जाती है. फिलहाल यह हॉस्टलर्स के लिए ही बनाई जा रही है, लेकिन जल्द ही गोरखपुर के रीजनल स्टेडियम को भी एक एस्ट्रोटर्फ की सौगात मिलने की उम्मीद है.

कंपनी ने नेक्स्ट मंथ तक इसे पूरा करने के लिए कहा है. इसके बाद इसका विधिवत इनॉगरेशन किया जाएगा. फिलहाल बच्चे इस पर प्रैक्टिस कर रहे हैं.

- अरुणेंद्र पांडेय, प्रिंसिपल, वीर बहादुर सिंह स्पो‌र्ट्स कॉलेज