-सोसाइटी में रहने वाले लोगों की जेब पर बढ़ेगा जनरेटर में इस्तेमाल होने वाले डीजल का बोझ

Meerut . डीजल के दाम में हो रही बढ़ोतरी का असर अब हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले लोगों को भी प्रभावित कर रहा है. सोसाइटी में इमरजेंसी पॉवर के लिए डीजल के खर्च का बोझ सोसाइटी में रहने वाले लोगों की जेब पर पड़ने लगा है.

बढ़ गया खर्च

डीजल के दाम में बढ़ोतरी और गर्मियों में लगातार बढ़ रही बिजली कटौती से हाउसिंग सोसाइटीज में पॉवर बैकअप के लिए लगे जेनरेट का खर्चा बढ़ता जा रहा है. डीजल के दाम और बिजली कटौती के कारण जेनरेटर का उपयोग जैसे-जैसे बढ़ रहा है सोसाइटी का निर्धारित बजट बिगड़ता जा रहा है. हालत यह है कि सोसाइटी में डीजल पर खर्चा 8 से 12 हजार रूपये तक बढ़ चुका है.

बढ़ सकता है चार्ज

गत माह से डीजल के दाम में बढ़ोतरी के बाद भी हाउसिंग सोसाइटी ने अपने सुविधा शुल्क में इजाफा नहीं किया है. हां, यह जरूर है कि अगर जल्द ही डीजल के दाम में और बिजली कटौती में कमी नहीं आई तो सोसाइटी सुविधा शुल्क बढ़ा सकती है. इसका सीधा असर सोसाइटी में रहने वाले लोगों की जेब पर पड़ेगा.

डीजल के दाम के साथ-साथ इस मौसम बिजली कटौती भी बढ़ जाती है. इस कारण जेनरेटर का प्रयोग अधिक होता है तो स्वाभाविक तौर पर खर्चा भी बढ़ेगा. डीजल के दाम बढ़ने से करीब दो से ढाई हजार रूपये प्रति दिन का खर्च बढ़ गया है. रोजाना करीब 280 से 300 लीटर डीजल की खपत हो रही है.

हरवीर सिंह, मैनेजर सुपरटेक

बिजली पिछले माह तक आधा से एक घंटा के लिए कट रही थी. हालांकि इस माह करीब 3 घंटे एवरेज कटौती हो रही है. उस पर डीजल के दाम में 7 से 8 रूपये की वृद्धि हो चुकी है. ऐसे में सोसाइटी का बजट प्रभावित हो रहा है. हालांकि अभी रेसीडेंट शुल्क नहीं बढ़ाया गया है. करीब 10 से 12 हजार रूपये प्रति माह खर्च बढ़ गया है.

एके कंसल, द्वारिका टॉवर

जब बिजली ज्यादा जाएगी तो जेनरेटर का प्रयोग भी अधिक होगा. ऐसे में डीजल के दाम बढ़ने से फर्क तो पडे़गा. पर अभी इतना फर्क भी नहीं पड़ा है कि हाउसिंग सोसाइटी का चार्ज बढ़ाया जाए.

राम कुमार शर्मा, अध्यक्ष, हनी गोल्फ टॉवर