-वन एवं पर्यावरण विभाग के पास नियमित पेट्रोलिंग के लिए नहीं है अपना बोट

PATNA: पटना में गांगेय डॉल्फिन के संरक्षण के लिए यहां के गंगा क्षेत्र में जाल डालने की सख्त मनाही है। लेकिन मछलियों को पकड़ने के लिए जाल डाला जा रहा है। गांगेय डॉल्फिन वर्ष 2010 से राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित है। इसके संरक्षण के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग के द्वारा नियमित पेट्रोलिंग किया जाना है। लेकिन दैनिक जागरण की पड़ताल में पता चला है नियमित पेट्रोलिंग नहीं की जाती है और जाल डाला जा रहा है। पटना कॉलेज घाट, एनआईटी घाट में यह दिन के उजाले में धड़ल्ले से किया जा रहा है। वह भी एक या दो नाव नहीं, कई नाव इस गैर कानूनी काम में गंगा में घूम रहे हैं। जानकारी हो कि करीब डेढ़ वर्ष पूर्व ही तीन डॉल्फिन की मौत जाल में फंसकर हुई थी। कई बार मामला मीडिया तक आने से पहले ही दबा देने का प्रयास होता है। ऐसे में सरकार के ही नियम की कैसे धज्जियां उड़ायी जा रही है, इसे आप समझ सकते हैं।

डॉल्फिन के लिए गर्मी का समय ज्यादा खतरनाक

डॉल्फिन संरक्षण के विशेषज्ञ एवं जूलॉलिकल सर्वे ऑफ इंडिया के प्रभारी अधिकारी एवं वैज्ञानिक डॉ गोपाल शर्मा ने बताया कि गर्मी का समय डॉल्फिन के जाल में फंसकर मरने का खतरनाक समय होता है। इसका कारण है कि इस सीजन में पानी की कमी हो जाती है। जबकि डॉल्फिन मछलियों के आस-पास ही रहती है। जब जाल डाला जाता है तो उसमें डॉल्फिन के फंसने की संभावना प्रबल हो जाती है। जबकि बारिश में पानी अधिक होने से डॉल्फिन भी अलग- अलग हिस्सों में दूर तक जाते रहती है। इस वजह से डॉल्फिन की जाल में फंसने की संभावना कम होती है।

फिर से ट्रेनिंग देने की जरूरत

डॉ गोपाल शर्मा ने बताया कि डॉल्फिन एक राष्ट्रीय जलीय जीव है। इसका संरक्षण बेहद आवश्यक है जलीय क्षेत्र के इको-सिस्टम के लिए। इस बारे में विस्तृत रूप से मछुआरों को ट्रेनिंग दी गई है। ट्रेनिंग पर सरकार काफी पैसा खर्च करती है। लेकिन इसके बाद भी मछुआरों के द्वारा जाल डालने की समस्या को देखते हुए फिर से उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने की जरूरत है।

पेट्रोलिंग भाडे़ पर

डीजे आई नेक्स्ट ने पटना के डीएफओ हेमंत पाटिल से गंगा में नियमित पेट्रोलिंग की बात उठाई। वे यह नहीं बता सके कि हफ्ते में कितने दिन पेट्रोलिंग होती है। उन्होंने कहा कि विभाग के पास अपना बोट नहीं है। भाडे़ पर नाव लेकर गंगा के विभिन्न हिस्सों में पेट्रोलिंग की जाती है।

अब तक किसी को सजा नहीं

गंगा में मछली पकड़ने के लिए जाल डालने और डॉल्फिन के फंसने के मामले पहले हो चुके हैं। इसके बाद से ही यह आदेश प्रभावी रूप से लागू करने की बात हुई थी कि गंगा में जाल नहीं डालना है। लेकिन जाल डाला जा रहा है। जाल डालना सरकारी आदेश का उल्लंघन हैं। अब तक किसी को सजा नहीं हुई है। वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा इसकी पुष्टि की गई है।

मछुआरा समुदाय को डॉल्फिन संरक्षण के लिए और जागरूक किया जाएगा। डीएफओ भी पेट्रोलिंग के माध्यम से इस पर निगाह रखेंगे तभी स्थिति बेहतर होगी।

सुरेंद्र सिंह, एडीशनल सेक्रेटरी वन एवं पर्यावरण विभाग, बिहार सरकार

दानापुर से लेकर फतुंहा तक का क्षेत्र इस मामले में बहुत संवेदनशील है। क्योंकि यहां हृयूमन एक्टिविटी ज्यादा है। जाल डाला जाएगा तो नुकसान की संभावना बनती है।

-डॉ गोपाल शर्मा, प्रभारी अधिकारी एवं वैज्ञानिक जेडएसआई, पटना