एक करोड़ के ऊपर पहुंचा आंकड़ा

गुरुवार को मौनी अमावस्या के पूर्व बुधवार को ही शहर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महास्नान की पूर्व संध्या पर ही तीस लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगा ली थी और गुरुवार को शुरू हुआ स्नान का सिलसिला दोपहर तीन बजे तक 70 लाख की संख्या पर कर चुका था। इस तरह से दो दिनों में एक करोड़ से अधिक लोगों ने डुबकी लगाकर हर-हर गंगे का उदघोष किया।

अभी और बढ़ेगी यह संख्या

बता दें कि मौनी अमावस्या का पुण्य काल गुरुवार सुबह छह बजे से शुरू होकर शुक्रवार की सुबह 3.04 बजे तक रहेगा। ऐसे में श्रद्धालुओं की संख्या अगर डेढ़ करोड़ के आंकड़े को पार कर जाए तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के बावजूद दिनभर किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं मिला। ऑफिसर्स का दावा है कि इस महास्नान को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया है। क्राउड मैनेजमेंट को लेकर सुबह से शाम तक चप्पे-चप्पे पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रही।

किसी को ठहरने की नहीं दी इजाजत

हालांकि प्रशासन ने पूर्व में 80 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई थी लेकिन अब यह आंकड़ा पार हो चुका है। लाखों की भीड़ को मैनेज करने में पुलिस और प्रशासन को जमकर पसीना बहाना पड़ा। क्राउड मैनेजमेंट के चलते श्रद्धालुओं को चलते रहने के लिए प्रेरित किया गया। जगह-जगह हो रहे एनाउंसमेंट में बार-बार कहा गया कि श्रद्धालु चलते-फिरते नजर आएं, ताकि भगदड़ की स्थिति पैदा न हो। यहां तक संगम नोज पर स्नान के बाद सुस्ताते श्रद्धालुओं को भी एआरएफ ने उठा दिया। फोर्स ने उन्हें स्नान के बाद मेला एरिया से बाहर जाने की हिदायत दी।

मौसम ने भी दिया साथ

मॉर्निंग में फॉग और आसमान में बादल छाए रहने से एक बार लगा कि श्रद्धालुओं की संख्या घट जाएगी लेकिन इससे पहले कि ऐसा होता, मौसम की करवट ने सभी के चेहरे खिला दिए। दोपहर बारह बजे खिली तेज धूप के बाद अचानक श्रद्धालुओं का रेला बढ़ गया। ठंड के चलते घरों में दुबके लोग भी गंगा में डुबकी लगाने पहुंचे। आलम यह था कि देर शाम तक माघ मेले में जबरदस्त भीड़ नजर आई। दिन ढलने के बाद भी लोगों की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही थी।

कागज की नाव से की पूजा

स्नान के दौरान श्रद्धालुओं ने संगम पर पूजा-पाठ भी की। आमतौर पर गंगा में फूल-माला चढ़ाने के बाद जलते दीये को दोने में रखकर पानी में डाला जाता है, लेकिन दुकानदारों ने इसकी नई ट्रिक निकाली जो काम कर गई। उन्होंने कागज की नाव बनाकर उसमें पूजा की सामग्री बेची, जिससे लेने वालों की भारी भीड़ जमा रही। लोगों ने कागज की नाव पर दीये जलाकर गंगा के पानी में प्रवाह कर दिया। इस तरह से संगम पर काफी देर तक कागज की नाव ही नाव नजर आती रही।

सरकारी गाड़ी से कराया स्नान

प्रशासन ने भले ही स्नान के दौरान व्हीकल्स के माघ मेला एरिया में घुसने पर एंट्री लगा दी थी लेकिन खुद सरकारी वाहनों ने इस नियम को तोडऩे में कोई कसर नहीं छोड़ी। सरकारी वाहनों में भरकर बेरोक-टोक श्रद्धालु संगम में स्नान के लिए पहुंचते रहे। चाहकर भी इन वाहनों को मौके पर तैनात पुलिस रोक नहीं सकी। इतना ही नहीं, हेल्थ डिपार्टमेंट की एम्बुलेंस में भी भर-भरकर श्रद्धालुओं को संगम घाट तक पहुंचाया गया।

लगातार होती रही निगरानी

लाखों की भीड़ को मैनेज करने के लिए किए गए इंतजाम को चुस्त-दुरुस्त रखने में अधिकारी भी पीछे नहीं रहे। डीएम राजशेखर, अपर नगर आयुक्त सतीश शर्मा, मेला अधिकारी सुनील कुमार मिश्र सहित मजिस्ट्रेट लगातार मेला एरिया और घाटों की निगरानी करते रहे। इसके अलावा सिविल डिफेंस, प्रयागवाल सहित कई संस्थाओं ने भी व्यवस्था को बनाए रखने में जबरदस्त सहयोग दिया।

क्यों होती है इस स्नान में भीड़

ज्योतिषाचार्य के अनुसार स्नानपर्व मौनी अमावस्या पर मौन रहकर ही डुबकी लगाने का पुण्य लाभ मिलता है। चंद्रमा को मन और सूर्य को आत्मा का स्वामी ग्रह माना गया है और इस महास्नान पर सूर्य और चंद्रमा के एक साथ मकर राशि में संचरण करने से मन और आत्मा के बीच संयोग बनता है। यह शुभयोग गुरुवार की सुबह छह बजे से शुक्रवार की सुबह 3.04 बजे तक बना रहेगा।