वाशिंगटन (पीटीआई)। पाकिस्तान के साथ संबंध बढ़ाने पर भारत का स्टैंड है कि बातचीत और आतंकवाद एक साथ संभव नहीं है। अब पाकिस्तान के एक पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने भारत के इस स्टैंड का सपोर्ट करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच एक और उच्च स्तरीय बैठक तब तक बेकार होगी जब तक कि पाकिस्तान सुनिश्चित नहीं करता है कि उसके इलाके में आतंकवाद को जड़ से खत्म कर दिया गया है। अमेरिका में हुसैन हक्कानी ने मंगलवार को मीडिया से कहा कि भारत के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान की हालिया पहल को उस पर पड़ रहे आर्थिक और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। बता दें कि उनका यह बयान 13-14 जून को किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन से ठीक पहले आया है। भारत और पाकिस्तान क्षेत्रीय सुरक्षा समूह का हिस्सा हैं और दोनों देशों के नेता बिश्केक की बैठक में भाग लेने वाले हैं।

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45 बार हो चुकी है बातचीत
पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने दोनों देशों के बीच सभी मतभेदों को हल करने के लिए बातचीत फिर से शुरू करने का अनुरोध किया था लेकिन शिखर सम्मेलन से अलग हटकर दोनों के बीच कोई भी बैठक की योजना नहीं बनाई गई है। हक्कानी ने कहा, '1950 से दिसम्बर 2015 के बीच दोनों देशों के नेताओं के बीच 45 बार मुलाकात हुई है लेकिन बातचीत में कभी भी शांति कायम नहीं हो पाई है। बातचीत के दरवाजे को कभी भी स्थायी रूप से बंद नहीं माना जाना चाहिए।' हक्कानी ‘हडसन इंस्टीट्यूट में 'साउथ और मिड एशिया’ के डायरेक्टर हैं। इन्हें पाकिस्तानी सरकार और जिहादी विचारधारा का निर्विवाद आलोचक माना जाता है।

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