ं- खबर लाई रंग, एजाज ने दिया आई नेक्स्ट को धन्यवाद

- प्लास्टर पर चढ़ाने के नाम पर मांगा जा रहा था पैसा, नहीं मिला था भूकंप मुआवजा का चेक

GORAKHPUR : भूकंप पीडि़त एजाज के हाथ की चोट तो ठीक नहीं हुई, मगर उसके चेहरे पर मुस्कुराहट नजर आ रही थी. वह सारे दर्द को भूल सा गया था. फ्रैक्चर्ड हाथ में पक्का प्लास्टर बंधा था तो हाथ में 4300 रुपए मुआवजे का चेक था. एजाज और उसकी मां सनवरा बार-बार आई नेक्स्ट को धन्यवाद दे रहे थे क्योंकि इलाज और मुआवजा की चेक के लिए दर-दर भटक रहे एजाज और उसकी मां का तीन दिन पहले कोई सुनने वाला नहीं था. प्लास्टर बांधने के नाम पर जहां डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के कर्मचारी पैसा मांग रहे थे, वहीं मुआवजा के नाम पर सिर्फ लेखपाल ने पूछताछ कर फाइल क्लोज कर दी थी. एजाज के दर्द को जब आई नेक्स्ट ने समझा और उससे पूरे महकमे को अवगत कराया तो आनन-फानन में न सिर्फ उसका इलाज शुरू हो गया बल्कि चेक भी बन गई. फ्राइडे को एजाज और मां सनवरा ने आई नेक्स्ट को कोटि-कोटि धन्यवाद दिया.

भूकंप में घायल हुआ था एजाज

डेयरी कॉलोनी में रहने वाली सनवरा एक प्राइवेट हॉस्पिटल में काम करती है. पति की मौत के बाद वह घर का खर्चा चला रही है. बेटा एजाज अहमद (22 साल) भी घर के खर्चे में मां की मदद करने के लिए मजदूरी करता है. 12 मई को कूड़ाघाट स्थित गन्ना शोध केंद्र के पास मजदूरी कर रहा था. तभी अचानक भूकंप के तेज झटकों ने धरती को हिला दिया. नतीजा गन्ना शोध केंद्र की कमजोर दीवार ढह गई जिसमें एजाज दब गया. काफी देर तक वहीं तड़पता रहा. वहां से गुजर रहे दो लड़कों ने उसे डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में एडमिट कराया. जहां हाथ में फैक्चर की बात पता चली. एजाज का हाल लेने डीएम रंजन कुमार भी पहुंचे और सीएमओ भी. सभी ने आश्वासन दिया, मगर मुआवजे की रकम नहीं मिली. डॉक्टर ने भी कच्चा प्लास्टर चढ़ा दिया. 22 मई को घर में अचानक चक्कर खाकर एजाज गिर गया. इससे न सिर्फ उसके हाथ में लगा प्लास्टर टूट गया बल्कि हाथ दोबारा फैक्चर हो गया. पक्का प्लास्टर चढ़ाने के लिए जब एजाज हॉस्पिटल आया तो कर्मचारियों ने पहले भगा दिया. फिर रिक्वेस्ट करने पर कर्मचारी पैसा मांगने लगे. दर-दर भटक रहे एजाज और उसकी मां की समस्या आई नेक्स्ट ने सुनी और 'भूकंप पीडि़त से मांगा प्लास्टर चढ़ाने का फैसला' हेडिंग से न्यूज पब्लिश की. न्यूज पब्लिश होते ही सरकारी महकमा हरकत में आ गया. आनन-फानन में एजाज के नाम की 4300 रुपए मुआवजे की चेक बन गई और हॉस्पिटल बुलाकर पक्का प्लास्टर भी चढ़ा दिया गया.