First visit to Jamshedpur
मैंने जमशेदपुर के बारे में काफी कुछ सुन रखा था. निहारिका (वाइफ) के फैमिली फ्रेंड की शादी है, इसलिए मैं उसके साथ शादी को एंज्वॉय करने आया हूं. जमशेदपुर का ये मेरा पहला विजिट हैं.


काफी सुना था आरके भसीन के बारे में...
मेरे जमशेदपुर आने का मेन मोटो था, अपने ससुराल को देखना. मैं अपने ससुर आरके भसीन के बारे में जानना चाहता था. हर कोई उनकी दरियादिली की तारीफ करता है. हमारी शादी के पहले ही उनका इंतकाल हो गया था, इसलिए उन्हें जानने का मौका नहीं मिल पाया. इस वजह से मैं जमशेदपुर आकर उनके बारे में और भी जानना चाहता था.

अब मैं अपने लिए जीना चाहता हूं
जब से मैंने इंडस्ट्री ज्वाइन किया है, तब से मेरी लाइफ पूरी तरह से चेंज हो गई है. टाइम की कमी की वजह से मेरे कई सपने अधूरे रह गए, जिसे मैं पूरा नहीं कर पा रहा था. इसलिए मैंने काम से कुछ दिनों का ब्रेक लिया है, ताकि अपनी लाइफ को खुलकर जी सकूं. मैैं अपने लिए कुछ समय निकालकर लाइफ को एंज्वॉय करना चाहता हूं.

...तो पसंद आया वाइफ को
इन खाली समय में मै अपनी आर्टिस्टिक नेचर को बाहर लाना चाहता हूं. मुझे चीजें बनाने का काफी शौक है. मेरी वाइफ के लिए मैंने एक लैैंप बनाया, जो उसे काफी पसंद भी आया है.

टीवी की पहुंच है ज्यादा
आज टीवी इंडस्ट्री काफी आगे बढ़ चुकी है. फिल्म लिमिटेड लोगों तक ही पहुंच पाती है, लेकिन टेलीविजन हर घर में देखा जाता है. इस वजह से बॉलीवुड के कई हस्ती भी टेलीविजन में अपना हाथ आजमा रहे हैं. एग्जाम्पल के तौर पर शाहरुख, अमिताभ, सलमान हमारे सामने हैं. आज टेलीविजन की पहुंच लोगों के बीच ज्यादा है.

दिल के करीब है
वैसे तो मैंने कई मूवी में काम किया लेकिन प्रकाश झा की मूवी मृत्यूदंड में मेरा पसंदीदा है. इस फिल्म में माधुरी दीक्षित मेरे अपोजिट थी. इस फिल्म में मेरा काफी चैलेंजिंग रोल था. यह फिल्म हमेशा हमारे दिल के करीब रहेगी.

Emotions की है कमी
आजकल की मूवी में पहले जैसे इमोशंस देखने को नहीं मिलते. इसका सबसे बड़ा रीजन है लोगों के पास समय की कमी का होना. आज के लोगों की सोच बदल चुकी है. उनके पास एक-दूसरे के लिए समय ही नहीं रहा.

साहेब बीबी और गुलाम
मेरी सहारा में एक सीरियल आई थी साहेब बीबी और गुलाम. इसमें मेरे अपोजिट रवीना टंडन थी. मैैं उस कैरेक्टर को फिर से प्ले करना चाहता हूं. दिलीप कुमार द्वारा देवदास में निभाया गया कैरेक्टर को निभाना मेरी ख्वाहिश है. इसमें दिलीप साहब ने जबरदस्त एक्टिंग की थी.

जमशेदपुर के लोग काफी simple है
यहां आकर लोगों से मिल कर मुझे काफी अच्छा लगा. यह मेट्रो सिटी से काफी अलग है. यहां के लोग काफी सिंपल और रियल है. मुझे यहां की ग्रीनरी भी काफी पसंद आई.


हिम्मत न हारे youth

यूथ से यही कहना चाहूंगा कि वो  अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार संघर्ष करते रहे. मेहनत करने वालों को सफलता एक दिन जरूर मिलेगी. आप शॉर्टकट के चक्कर में कभी न पड़े. अगर मेहनत करेंगे, तो लाइफ की अहमियत का एहसास होगा.

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