कानपुर। आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 का आगाज गुरुवार से हो रहा। पहला मैच मेजबान इंग्लैंड बनाम साउथ अफ्रीका के बीच खेला जाएगा। भारत इस टूर्नामेंट की शुरुआत 5 जून से करेगा। विराट कोहली की अगुआई में टीम इंडिया इस विश्व कप की प्रबल दावेदार है। हालांकि कोहली की टीम को ये वर्ल्ड कप जीतना है तो भारत के पिछले दो वर्ल्ड कप जीत का फार्मूला दोहराना होगा।

क्या है इंडिया की जीत का पैटर्न?
हम बात करने जा रहे हैं भारतीय टीम के दोनों वर्ल्ड कप (1983 और 2011) का खिताब जीतने का पैटर्न कैसा रहा और दोनों में क्या समानताएं रहीं।
icc cricket world cup 2019: भारत की दो वर्ल्ड कप जीत में ये थी समानताएं,क्या इस बार भी दोहराएंगे
1. ओपनर्स और नंबर 3 बल्लेबाजी

-वर्ल्ड कप 1983 में सुनील गावस्कर और 2011 में सचिन तेंदुलकर बड़े नाम थे, जो सलामी बल्लेबाज थे। ये दोनों मुंबई के ही थे। दोनों ही बल्लेबाज तकनीक के साथ बल्लेबाजी करने के लिए मशहूर थे।
-1983 में क्रिस श्रीकांत और 2011 में वीरेंदर सहवाग हार्ड हिटर सलामी बल्लेबाज थे।
-नंबर 3 पर बल्लेबाजी के लिए फाइनल में मोहिंदर अमरनाथ (1983) और गौतम गंभीर (2011) थे। दोनों ही खिलाड़ी दिल्ली के थे। अगर ओपनर्स फ्लॉप हुए तो नंबर 3 बल्लेबाज स्कोरबोर्ड पर रन बढ़ा सकता था।

कोइंसिडेंस
दोनों ही वर्ल्ड कप में इंडियन टीम ने 4 लीग मैच जीते थे और फाइनल मुकाबला शनिवार को खेला गया था।
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2. मजबूत, समझदार और सहज कप्तान
कहते हैं कोई टीम तब मजबूत होती है जब उस टीम का कप्तान मजबूत हो। कपिल देव और महेंद्र सिंह धोनी इस कहावत पर बिल्कुल खरे उतरते हैं। दोनों ही कप्तानों के अंदर आत्मविश्वास था और तुरंत निर्णय लेने की क्षमता थी। यह बात इससे सिद्ध होती है कि 2011 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में महेंद्र सिंह धोनी खुद युवराज सिंह से पहले उतरे थे, जबकि युवराज सिंह अच्छे फॉर्म में थे।

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