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PATNA: पटना में इस्लामिया कॉलेज को ही बीएड में डायरेक्ट एडमिशन की परमिशन है. बाकी सभी कॉलेज बिना इंट्रेस एग्जाम के एडमिशन नहीं ले सकते. इस्लामिया कॉलेज इसी छूट का मिस यूज कर रहा है. खुलेआम बीएड में एडमिशन के नाम पर एक लाख रुपए की डोनेशन मांगी जा रही है. जबकि राजभवन से लेकर हाईकोर्ट तक ने बिहार में बीएड की फीस अधिकतम 1.5 लाख रुपए तय कर रखी है. सभी कॉलेजों को आदेश है कि कोई भी डेढ़ लाख से अधिक फीस लेता है तो उसकी मान्यता जा सकती है. बावजूद इस्लामिया कॉलेज बीएड में एडमिशन के लिए 2.5 लाख रुपए ले रहे हैं.

दिव्यांग तक से ले रहे डोनेशन

इस्लामिया कॉलेज में न सिर्फ आम स्टूडेंट्स से मोटी रकम वसूलते हैं बल्कि दिव्यांग स्टूडेंट्स से भी डोनेशन मांगा जाता हैं. दिव्यांग समीर कुमार ने बताया कि एडमिशन के लिए यहां पर एक लाख रुपए एक्स्ट्रा बतौर डोनेशन लिया जा रहा है. दिव्यांग एक्ट के तहत दिव्यांगों को हर कॉलेज में निर्धारित शुल्क में छूट दी जाती है लेकिन यहां पर ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

फीस तो 2.5 लाख रुपए ही लगेगी

खेल को उजागर करने के लिए दैनिक जागरण आई नेक्स्ट का रिपोर्टर स्टूडेंट बनकर इस्लामिया कॉलेज में पहुंचा. जब रिपोर्टर ने एडमिशन के लिए बात की तो खुलेआम डोनेशन मांगा गया. पेश है बातचीत के अंश.

रिपोर्टर- सर, मुझे बीएड में एडमिशन चाहिए.

कर्मचारी - हां ले लीजिए.

रिपोर्टर - कितना पैसा लगेगा.

कर्मचारी - 2.5 लाख रुपए.

रिपोर्टर - रसीद कितने रुपए की मिलेगी.

कर्मचारी - डेढ़ लाख रुपए की.

रिपोर्टर- जब पैसा 2.5 लाख रुपए लेंगे तो रसीद भी उतने की ही देंगे न?

कर्मचारी - रसीद 1.5 लाख रुपए की ही मिलेगी.

रिपोर्टर - लेकिन सरकार की ओर से 1.5 लाख रुपए फीस निर्धारित है .

कर्मचारी- एडमिशन लेना है तो 2.5 लाख रुपए देना ही होगा.

इस तरह की जानकारी नहीं है. मामला प्रकाश में आने पर दोषियों और कॉलेज प्रशासन पर कार्रवाई की जाएगी.

प्रो. जीके चौधरी, उप कुलपति पाटलिपुत्रा विश्वविद्यालय