BAREILLY: शहर की सड़कों पर इन दिनों अचानक दर्जन भर से अधिक ऐसे कथित दवाखाना खुल गए हैं, जो इलाज के नाम पर अवैध दवाएं बेचकर आम लोगों से मोटी रकम वसूलकर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं. इनके पास न कोई डॉक्टर है न ही फार्मासिस्ट और दवा बेचने का लाइसेंस भी नहीं है. कैनोपी में खोले गए कथित दवाखाने पर 250 रुपए से लेकर एक हजार रुपए में प्रतिदिन की दवा दी जा रही है. कथित दवाखाना चलाने वाले 300 बीमारी का इलाज एक ही स्थान पर करने का दावा भी करते हैं. यह लोग बुजुर्ग महिलाओं और सीधे साधे लोगों को जमकर ठग रहे हैं.

दिलचस्प बात यह है कि ठगी की सबसे बड़ी दुकान कलेक्ट्रेट में डीएम से लगभग 100 मीटर और एफएसडीए ऑफिस से लगभग 50 मीटर की दूरी पर चल रहा है. जहां से सभी अधिकारियों का आना जाना दिन भर लगा रहता है. कैनोपी में चल रहे दवाओं के इस गोरखधंधे की हकीकत जानने दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम पहुंची तो कथित दवाखाना चला रहे शख्स ने बताया कि वह उसी दिन कैनोपी लगाता है जिस दिन कलेक्ट्रेट खुलती है. जिस दिन कलेक्ट्रेट बंद रहती है उस दिन वह भी कैनोपी नहीं लगाता है.

बातचीत के अंश

रिपोर्टर-भाई किस मर्ज की दवाई है आपके पास.

दुकानदार: आपको किस मर्ज की दवा चाहिए, हमारे पास तो 300 मर्ज की दवा है.

रिपोर्टर: मेरी मम्मी के सिर में दर्द रहता है.

दुकानदार: दवा मिल जाएगी सीरप और कैप्सूल से मर्ज भी खत्म हो जाएगा.

रिपोर्टर: आप कैसे विश्वास के कह सकते हो कि मर्ज खत्म हो जाएगा.

दुकानदार: अगर हम डॉक्टर की शॉप पर बैठे होते तो विश्वास कर लेते.

रिपोर्टर: मेरे पिता के भी पैर से कमर तक दर्द रहता है.

दुकानदार: ठीक हो जाएगा आठ दिन दवा चलेगी. लेकिन एक बार मोबाइल से बात करानी होगी.

रिपोर्टर: ठीक है, आपके पास और कितने मर्ज की दवाई मिल सकती है.

दुकानदार: मेरे पास तो हर मर्ज की दवा है. दिल, नस, दिमाग, हड्डी सहित महिलाओं के गुप्त रोगों का भी गारंटी से इलाज है मेरे पास.

रिपोर्टर: आपने दवा तो बता दी लेकिन अब रुपए तो बता दो.

दुकानदार: सभी मर्ज की दवा अलग-अलग रेट की है. कम से कम एक दिन की दवा 250 रुपए से शुरूआत है.

रिपोर्टर: कमर और पैर दर्द की दवा एक दिन की कितने रुपए की होगी.

दुकानदार: कमर और पैर दर्द के लिए तो दो कैप्सूल ले लो, पांच सौ रुपए के दो कैप्सूल हैं. एक कैप्सूल एक दिन खाकर देखो.

10 मिनट में पहुंचे दो मरीज

कलेक्ट्रेट पर लगी दवा की दुकान पर एक युवक दोपहर को पहुंचा. उसने दुकानदार से एक दवा उठाते हुए पूछा यह किस मर्ज की दवा है. जिस पर दुकानदार ने पूछा कि आपको क्या मर्ज है. युवक ने बताया कि मुझे गुप्त रोग है. इस पर दुकानदार बोला आपने बिल्कुल सही दवा उठाई है, यही फायदा करेगी. यह सुनते ही युवक दुकानदार पर बिखर पड़ा. उसने कहा कि मैं पहले भी यह दवा खा चुका हूं. कुछ फायदा नहीं हुआ है. जिस पर दुकानदार ने कहा कि दवा कहां से ली है, युवक ने बताया कि गन्ना मिल से. दुकानदार ने कहा कि तब तो आपने हमारी दुकान से दवा ली है. अब अगर दवा ने फायदा नहीं किया तो इसका मतलब आपको अंदर से प्रॉब्लम है, वह ठीक नहीं हो सकती. इसी बीच एक महिला स्कूटर लेकर दुकान पर पहुंची और बताया कि उसके पैर से कमर तक दर्द है. दुकानदार ने बताया कि दर्द कमर से आगे को आता है या पीछे को जाता है. महिला ने बताया कि पीछे की तरफ दर्द जाता है. जिस पर दुकानदार ने बताया कि 250 रुपए का एक कैप्सूल है दो दिन दो कॅप्सूल खा लो फायदा हो जाएगा.

इस तरह से किसी भी मर्ज की दवा बेचना गलत है. क्योंकि डॉक्टर की बगैर सलाह के दवा यूज करने से नुकसान भी हो सकता है. इस तरह की दवाओं को बेचना जिंदगी से खिलवाड़ करना है.

डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ

कलेक्ट्रेट के पास मेडिकल स्टोर्स के अलावा कहीं पर कोई कैनोपी लगाकर दवाई बेची जा रही है तो उसकी मुझे जानकारी नहीं है. कल देखती हूं. कैनोपी पर अगर दवाई बेची जा रही है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

उर्मिला, औषधि निरीक्षक सिटी