क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: राजधानी में अब भी बिना मान्यताप्राप्त कई स्कूल धड़ल्ले से चल रहे हैं. जिला प्रशासन की रिपोर्ट के बावजूद इन स्कूलों के खिलाफ कड़ी व ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है. राजधानी के 600 से अधिक ऐसे स्कूल हैं, जो बिना मान्यता के चल रहे हैं. शिक्षा विभाग के पास इन स्कूलों की मान्यता के लिए आवेदन दिए गए हैं, जिनमें मात्र 10 स्कूलों को मान्यता दी गई है. बाकी स्कूलों को मान्यता देने की प्रक्रिया के बीच ही बिना मान्यता प्राप्त चलाए जा रहे कई स्कूलों में स्टूडेंट्स के लिए हास्टल की व्यवस्था कर दी गई है. जो पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है. इन हॉस्टलों को बंद कराने का निर्णय लेते हुए विभाग के उपसचिव देवेन्द्र कुमार सिंह ने डीसी और डीईओ को पत्र लिखकर ऐसे तमाम स्कूलों की लिस्ट मांगी जो बिना मान्यता के चल रहे हैं और इनपर कार्रवाई की बात कही है. लेकिन रिपोर्ट के बावजूद पिछले तीन महीने से मामला पेंडिंग में पड़ा है. माना जा रहा है कि चुनाव को लेकर फाइल लटकाई जा रही है लेकिन इस बीच मैनेज का खेल भी जोरों से चल रहा है.

क्या लिखा है उपसचिव के लेटर में

लेटर में साफ लिखा है कि एक तो बिना मान्यता स्कूलों का संचालन हो रहा है और उससे भी ज्यादा गंभीर बात यह है कि इन स्कूलों के प्रबंधन द्वारा हॉस्टल भी चलाया जा रहा है. जब स्कूल को मान्यता मिली ही नहीं है तब हास्टल कैसे चलाए जा रहे हैं. यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.

जिला प्रशासन की रिपोर्ट तैयार

उपसचिव ने अधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों के हास्टल संचालन से संबंधित आवश्यक बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट जमा करें. इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले की गहनता से जांच कर रिपोर्ट भी तैयार कर ली है. लेकिन अब तक न तो स्कूलों को शो-कॉज किया गया है न ही किसी तरह की कार्रवाई की गई है.

कैसे रुकेगी निजी स्कूलों की मनमानी

विभाग का कहना है कि इस तरह बिना अनुमति हास्टल का संचालन कर नियमों को तोड़ा जा रहा है. निजी स्कूलों द्वारा लगातार मनमानी की शिकायतें मिलती रही हैं. मामला फीस वसूली का हो या शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चों के एडमिशन का, निजी स्कूलों द्वारा हमेशा नियम तोड़े जा रहे हैं. इतनी शिकायतों के बावजूद स्कूलों की मनमानी रोकने का कोई विकल्प विभाग के पास दिखाई नहीं दे रहा है.

वर्जन

करीब 600 स्कूलों के खिलाफ जांच संबंधी निर्देश दिए गए हैं. रिपोर्ट भी तैयार हो गई है और नियमों के अंतर्गत इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई, नोटिस आदि की जाएगी. सभी जिलों के डीसी को भी मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करना चाहिए.

एपी सिंह, शिक्षा सचिव