फिर चल पड़ी इंडियन ईकॉनोमी
विश्‍व बैंक और आईएमएफ ने भारत की नई सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को देखकर भारत के प्रति अपने रवैये में बदलाव लाया है. विश्‍व बैंक ने कहा है कि इंडियन ईकॉनोमी अपनी सुस्‍ती से बाहर निकल पड़ी है. गौरतलब है कि दोनों संस्‍थाओं ने मोदी सरकार द्वारा देश की ईकॉनोमी के हित में किए गए आर्थिक सुधारों और नीतिगत पहलों से अर्थव्यवस्था की रफ्तार फिर से पांच फीसद के ऊपर रहेगी. इन दोनों संस्‍थाओं ने अनुमान लगाया है कि करेंट ईयर में इंडियन ईकॉनोमी 5.6 से 6.4 परसेंट तक रहेगी.

भारत उबर गया है सुस्‍ती से

आईएमएफ के चीफ ईकॉनोमिस्‍ट ऑलिवियर ज्‍यां ब्‍लैंकार्ड ने आईएमएफ और वर्ल्‍डबैंक की वार्षिक मीटिंग में कहा कि भारत जैसे कुछ देश मंदी से पूरी तरह उबर गए हैं, लेकिन बाकी अब भी इससे जूझ रहे हैं. उन्‍होनें कहा कि नई सरकार ने पॉलिसी रिलेटेड स्‍टेप्‍स और ईकॉनोमिक रिफॉर्म्‍स पर काम किया है. इससे इन्‍वेस्‍टर्स फिर से इंडिया में निवेश करने लगे हैं. इन कदमों के चलते ही इंडिया इस तुलनात्मक मंदी से बाहर आ पाया है. इसके साथ ही आईएमएफ ने व‌र्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि 2015 में इंडियन की आर्थिक विकास दर 6.4 परसेंट पर पहुंच जाएगी. हालांकि चीन की आर्थिक रफ्तार घटने का अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार चालू वर्ष में चीन की ईकॉनोमिक ग्रोथ 7.4 परसेंट रहने की उम्‍मीद है जो अगले वर्ष घटकर 7.1 परसेंट होने का अनुमान लगाया है. इसके अलावा आईएमएफ ने वर्ष 2014 के लिए ग्‍लोबल डेवलपमेंट रेट 3.3 परसेंट रहने की उम्‍मीद की है.

पहले ही कह दिया था वर्ल्‍ड बैंक

विश्‍वबैंक ने अपनी हाफ ईयरली रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया था कि अगर देश के पीएम नरेंद्र मोदी बनते हैं तो इंडियन ईकॉनोमिक ग्रोथ 6.4 परसेंट तक जा सकती है. इस असर को वर्ल्‍डबैंक ने मोदी डिवीडेंट की उपाधि‍ दी है. गौरतलब है कि इंडियन ईकॉनोमी को अमेरिकन के पटरी पर लौटने का फायदा भी मिला है.

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