- ट्रेड यूनियन के बंद से मेरठ में हाहाकार

- बसों के बंद होने से लोगों को हुई काफी परेशानी

- बिजली कर्मियों के करीब 2000 कर्मचारी रहे हड़ताल पर

- बीएसएनएल के 34 एक्सचेंज पर नहीं हुआ काम

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Meerut : श्रम कानूनों में बदलाव और श्रमिकों के हितों में कानून बनाए जाने का लेकर देशव्यापी हड़ताल को लेकर मेरठ में भी इसका बड़ा असर देखने को मिला. रोडवेज की बसें पूरी तरह बंद रहीं. एसबीआई बैंक को छोड़कर सभी बैंक पूरी तरह से बंद रहे. बीमा सेक्टर और बीएसएनएल के भी हजारों कर्मचारियों ने कोई काम नहीं किया.

टेलीकॉम सेक्टर बंद

अगर बात टेलीकॉम सेक्टर की करें तो जिले के 1000 कर्मचारियों ने हड़ताल में पार्टिसिपेट किया. बीएनएनएल के जिले में 34 टेलीफोन एक्सचेंज हैं. इस बंद की वजह से बीएसएनएल को 2 करोड़ रुपए रेवेन्यू लॉस हुआ है.

श्रम कानूनों में जिस तरह से बदलाव हुए है वो कर्मचारियों के हित में नहीं है. उनमें बदलाव की काफी जरुरत है. अगर बदलाव नहीं किए गए तो आंदोलन इससे बड़े होंगे.

- नरेश पाल, जिला सचिव, बीएसएनएल इंप्लाई यूनियन

केंद्र सरकार की नीतियां पिछले महीनों में कर्मचारियों के प्रति हितकारी नहीं रही हैं. ऐसे में सरकार को कर्मचारियों की ताकत दिखाना काफी जरूरी हो गया है.

- प्रेम सागर तिवारी, जिला सचिव, नेशनल फेडरेशन ऑफ टेलीकॉम इंप्लाई बीएसएनएल

बसों के चक्के रहे बंद

रोडवेज की पांचों डिपो की बसें पूरी तरह से बंद रहीं. पांचों डिपो के करीब 3000 हजार कर्मचारियों ने हड़ताल की. किसी को भी बस का संचालन करने नहीं दिया. भैंसाली और वर्कशॉप पर धरना-प्रदर्शन किया. रोडवेज कर्मियों की इस हड़ताल की वजह से रोडवेज को करीब 80 लाख रुपए नुकसान हुआ है. रोडवेज की पांचों डिपो में कुल 729 बसों का संचालन होता है, जिनमें 300 बसें अनुबंधित होती हैं. वहीं एमसीटीएसएल की 120 बसों का संचालन नहीं हुआ. मेरठ सिटी बसों के न चलने के कारण 5 लाख रुपए के रेवेन्यू लॉस उठाना पड़ा.

केंद्र सरकार की ओर से जो रोड सेफ्टी बिल लाया गया है वो रोडवेज कर्मचारियों के लिए काफी नुकसानदायक है. इससे रोडवेज का कोई कर्मचारी नहीं मानेगा.

- सोहेल अहमद, क्षेत्रीय अध्यक्ष, रोडवेज इंप्लॉय यूनियन

बीमा सेक्टर पर भी असर

वहीं इस हड़ताल से बीमा सेक्टर भी अछूता नहीं रहा. इस हड़ताल के कारण एलआईसी को करीब ढ़ाई करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा. साकेत स्थित मेन ब्रांच में सभी कर्मचारियों ने काम बंद रखा और धरना दिया. दोपहर कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन भी दिया. आंकड़ों पर गौर करें तो एलआईसी की जिले में 28 ब्रांच हैं, जिनमें कार्यरत 700 कर्मचारियों ने हड़ताल की.

मौजूदा समय में जो श्रम कानून बनाया गया है वो श्रमिकों और कर्मचारियों के हित में नहीं है. हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि पुराना श्रम कानून कायम रखा जाए और कर्मचारी हितों का ध्यान रखा जाए.

- संजीव शर्मा, प्रांतीय अध्यक्ष, नॉर्थ-सेंट्रल जोन इंश्योरेंस इंप्लाई यूनियन

बैंकिंग सेक्टर भी प्रभावित

एआईबीईए यूनियन से संबंध रखने वाले बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर रहे. बाकी बैंकों ने अपने दरवाजों को खुला रखा, लेकिन स्टाफ और अधिकारियों की गैरमौजूदगी में वहां भी पब्लिक का काम नहीं हो सका. जिले के लीड बैंक सिंडीकेट बैंक के एलडीएम विनय शर्मा ने बताया कि जिले में सरकारी और प्राइवेट बैंकों की कुल ब्रांच 400 है. जबकि सिटी में 150 ब्रांच हैं. इन सभी बैंकों में आम दिनों में 50 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन होता है, जहां सिर्फ 20 करोड़ रुपए का हो पाया.

पब्लिक ओपिनियन

मुझे जानकारी नहीं थी कि बसों की हड़ताल थी. मैं बस काफी देर से वेट कर रहा था. मुझे दिल्ली दिल्ली जाना था.

- जाहिद, पैसेंजर

मैं लखनऊ से आया हूं. मुझे मुजफ्फरनगर जरूरी काम से जाना है. काफी से देर से वेट कर रहा हूं. अब ट्रेन से ही जाऊंगा.

- राहुल सिंह, पैसेंजर

इस तरह की हड़ताल से आम पैसेंजर को काफी तकलीफ होती है. हड़ताल करने से पहले आम पब्लिक के बारे में सोचना चाहिए.

- दिलनवाज, पैसेंजर

मैं बस की काफी देर से वेट कर रहा था. मुझे बहुत जरूरी काम से दिल्ली जाना है. अब लगता है कि ट्रेन से ही जाना पड़ेगा.

- मेहताब, पैसेंजर

हड़ताल करने वालों को पब्लिक की तकलीफ से कोई फर्क नहीं पड़ता है. भले ही पब्लिक को कितनी जरूरी काम से जाना हो.

- संदीप बालियान, पैसेंजर

मुझे जरूरी काम से दिल्ली पहुंचना था, लेकिन हड़ताल के कारण मुझे अब कई गुना रुपया खर्च कर टैक्सी से जाना पड़ेगा.

- अजय शिवाच, पैसेंजर