- चंद सेकंड में स्टेट से दिल्ली तक सूचना पहुंचेगी

- अर्ली वार्निग सिस्टम जारी करेगा भूकंप का अलर्ट

- कुछ चुनिंदा देशों में है अर्ली वार्निग सिस्टम तकनीक

ROORKEE (JNN) : भविष्य में यदि उत्तरकाशी से लेकर चमोली तक के क्षेत्र में भूकंप आएगा, तो चंद सेकेंड में इसकी सूचना दिल्ली तक पहुंच जाएगी. वहीं प्राइमरी अलर्ट के जरिए जिस क्षेत्र में भूकंप आया है, वहां के स्थानीय लोगों को भी सतर्क किया जा सकेगा. ऐसे में इससे जान-माल को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकेगा.

लगाए गए फ्9 सेंसर

आईआईटी रुड़की के आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन उत्कृष्टता केंद्र द्वारा अर्थक्वेक अर्ली वार्निग सिस्टम फॉर नॉर्दर्न इंडिया प्रोजेक्ट के तहत अब तक उत्तरकाशी से लेकर चमोली तक फ्9 सेंसर लगाए जा चुके हैं, जबकि अगले दो महीने तक फ्0 सेंसर और लगा दिए जाएंगे. अभी इनमें टेस्टिंग का काम चल रहा है. तकरीबन तीन करोड़ के इस प्रोजेक्ट के तहत उत्तरकाशी से लेकर चमोली तक क्00 सेंसर लगाए जाएंगे. इस सेंसर के जरिए ध्वनि तरंगों के माध्यम से देहरादून तक ख्0 सेकंड, हरिद्वार ख्ख् सेकंड, रुड़की फ्क् सेकंड, मुजफ्फरनगर ब्ब् सेकंड, मेरठ भ्7 सेकंड और दिल्ली तक मात्र 7म् सेकंड में भूकंप की सूचना के संबंध में अलर्ट जारी किया जा सकेगा.

उत्तरकाशी-चमोली अतिसंवेदनशील

प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इंवस्टीगेटर और भूकंप अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. अशोक माथुर के अनुसार उत्तरकाशी से लेकर चमोली तक का क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से अधिक संवेदनशील हैं. फिलहाल अभी तक ऐसी कोई तकनीक विकसित नहीं हो सकी है कि भूकंप आने से पहले इसका पता लगाया जा सके, लेकिन अर्ली वार्निग सिस्टम के माध्यम से भूकंप से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकेगा. उन्होंने बताया कि यह मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ एंड साइंस का प्रोजेक्ट है. जापान, ताइवान, टर्की, मैक्सिको सहित कुछ चुनिंदा देशों में अर्ली वार्निग सिस्टम तकनीक विकसित है. भारत में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस पर काम किया जा रहा है.

फाइव रिएक्टर पर कोई नुकसान नहीं

प्रो. अशोक माथुर ने बताया कि इस समय ख्9 स्टेशनों की एनआईसी से कनेक्विविटी है, जबकि दस स्टेशनों को बीएसएनएल के टॉवर के साथ जोड़ा गया है. उनके अनुसार आमतौर पर पांच तीव्रता के भूकंप से कोई नुकसान नहीं होता है. इसलिए सिस्टम में रिएक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता छह आने पर ही अलर्ट जारी किया जाएगा. उनके अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों छह-सात तीव्रता का भूकंप दिल्ली तक में जान-माल को नुकसान पहुंचा सकता है. उनके अनुसार सेंसर लगाने और टेस्टिंग का कार्य पूरा होते ही मॉकड्रिल किया जाएगा. इसके बाद मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ एंड साइंस के आदेशानुसार ही अलर्ट जारी किया जाएगा.

सायरन करेगा लोगों को अलर्ट

प्रोजेक्ट के को-प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर प्रो. अजय गैरोला के अनुसार आईआईटी के आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन उत्कृष्टता केंद्र में अर्थक्वेक अर्ली वार्निग सिस्टम लैब बनाई गई है. यहां पर सिस्टम लगाए गए हैं. सर्वर के माध्यम से इसे सेंसर से जोड़ा गया है. उन्होंने बताया कि सेंसर दो तरह से सूचनाएं देंगे. एक प्राइमरी और दूसरा सेकेंडरी अलर्ट. जैसे ही भूमि के अंदर हलचल होगी, तो तुरंत सेंसर प्राइमरी अलर्ट जारी करेंगे. इस दौरान जिस क्षेत्र में भूकंप आने वाला है, वहां पर एक तरह का सायरन लोगों को अलर्ट कर देगा, वहीं एक साथ कई जगहों पर संदेश देगा. इससे लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकेंगे.

ताइवान से मंगाए गये हैं सेंसर

पहाड़ के संवेदनशील क्षेत्रों में दस एमएम धातु की प्लेट में सेंसर लगाकर उन्हें जमीन के अंदर डाला गया है. इसे नजदीकी टॉवर से इंटरनेट के माध्यम से जोड़ा गया है. यह सेंसर ताइवान से मंगवाए गए हैं.

क्या होगा फायदा

भूकंप अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. अशोक माथुर के अनुसार चंद सेकेंड में सूचना मिलने से भूकंप से होने वाली तबाही को कम किया जा सकेगा. तुरंत जानकारी मिलते ही लोग बिल्डिंग से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकेंगे. पावर प्लांट, उद्योगों को सूचना देकर उन्हें बंद करवाया जा सकेगा.

यहां-यहां लग चुके हैं सेंसर

छाम, मनेरी, महिडंडा, माथली, ज्ञानसु, मतंरा खाल, भीरी मंडल, लगांसू, गोलती, श्रीनगर, देवप्रयाग, हिंदोला खाल, कर्णप्रयाग, अगस्त्यमुनि, घात, ऊखीमठ, जखोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, गोपेश्वर, मौरी, पुरोला, बरकोट, नौगांव, चंबा, भिलंगना, चिन्यालीसौड़, टिहरी, डूडा, उत्तरकाशी, चमोली, कोट, पोखरी, जोशीमठ, भराली, देवल में लगाए गए हैं सेंसर.