वक्री शनि का वृश्चिक राशि में 20 जून होगा प्रवेश

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ALLAHABAD: अपने भ्रमण के क्रम में ग्रहों के न्यायाधीश शनि ग्रह देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु में वक्री गति से मंगल की राशि वृश्चिक में प्रवेश करने जा रहे हैं. वक्री शनि का वृश्चिक राशि में 20 जून से प्रवेश हो जाएगा. इसका सभी 12 राशियों के जातकों पर कुछ न कुछ प्रभाव पड़ेगा. इसका असर 23 अगस्त तक रहेगा. 24 अगस्त को शनिदेव फिर स्थिति बदलेंगे.

ढाई साल एक राशि में

उत्थान ज्योतिष संस्थान के निदेशक पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वाचली ने बताया कि अपने स्वाभाविक संचरण के क्रम में शनि लगभग ढाई वर्ष एक राशि में विद्यमान रहते हैं. इस दौरान उनकी गति मार्गी और वक्री होती रहती है.

26 जनवरी को किया प्रवेश

इसके पहले शनिदेव अपनी मार्गी गति से वृश्चिक व धुन राशि में 26 जनवरी 2017 को प्रवेश किए थे. छह अप्रैल तक अपनी मार्गी गति में परिवर्तन कर वक्र गति से यात्रा करने लगे थे. संचरण के क्रम में ही 20 जून को शनिदेव धनु राशि से वृश्चिक राशि में जाएंगे. इस ग्रह परिवर्तन का मानव सहित अन्य जीव-जन्तुओं और पर्यावरण पर भी असर पड़ेगा.

24 अगस्त को फिर बदलाव

ज्योतिषाचार्य विद्याकांत पांडेय ने बताया कि वृश्चिक राशि में शनिदेव 24 अगस्त को फिर से मार्गी गति प्रारंभ करेंगे. वहां शनिदेव कार्तिक शुक्ल पक्ष पंचमी 23 अक्टूबर तक विद्यमान रहेंगे. उसी दिन फिर से धनु राशि में संचरण करने चले जाएंगे.

राशियों पर पड़ने वाला प्रभाव

मेष

शनि राजा और आय का कारक होकर अहम स्थान में होने से पैर में चोट व परिश्रम में अवरोध

वृष

शनि राज्य और भाग्य का कारक होकर सप्तम भाव में विद्यमान होंगे. इस वजह से प्रभुत्व और सम्मान में वृद्धि

मिथुन

शनि अहम और भाग्य का कारक होकर शत्रुभाव में विद्यमान रहने के कारण शत्रु विजय व भाग्य में अवरोध

कर्क

शनि सप्तम और अष्टम भाव का कारक होकर पंचम भाव में वक्री होगा. इसलिए सन्तान व विद्या क्षेत्र से कष्ट मिलेगा

सिंह

इस राशि वालों के लिए शनि षष्टेश और सप्तमेश होकर सुख भाव में वक्री होकर विद्यमान होंगे. इस कारण से माता को चोट संभव

कन्या

शनि पंचम और शत्रुभाव का कारक होकर पराक्रम भाव में विद्यमान रहेंगे. जातक के पराक्रम में वृद्धि व भाई को कष्ट

तुला

शनि सुख और विद्या का कारक होकर धनभाव में वक्री विराजमान होने की वजह से पेट की समस्या व वाणी तीव्रता

वृश्चिक

शनि लग्न भाव में पराक्रमेश-सुखेश होकर विद्यमान होंगे. स्वास्थ समस्या व भाई को कष्ट

धनु

शनि धन और पराक्रम का कारक होकर व्यय भाव में विद्यमान होंगे. खर्च में वृद्धि व धनागम में अवरोध

मकर

शनि लग्न व धन का कारक होकर आय भाव में रहेंगे. आय वृद्धि व नए व्यापार की शुरुआत

कुंभ

शनि लग्नेश व व्ययेश होकर राज्य भाव में रहेंगे. आंतरिक डर, वाणी में तीव्रता

मीन

शनि आयेश-व्ययेश होकर भाग्य भाव में रहेंगे. खर्च व संतान पक्ष से कष्ट