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LUCKNOW : यूपी में आयकर से 43 हजार करोड़ रुपये जुटते हैं, जबकि एक लाख करोड़ रुपये छूट के नाम पर छोड़ दिए जाते हैं। अब आयकर विभाग प्रदेश की उन 20 हजार संस्थाओं पर शिकंजा कसेगा जो दान या आर्थिक सहयोग के बदले लोगों को आयकर में छूट देने वाली रसीदें थमाती हैं। दिल्ली से आए प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (छूट) प्रमोद कुमार ने गुरुवार को बताया कि टैक्स के तौर पर देश भर में कुल आठ से दस लाख करोड़ रुपये सालाना आते हैं। छापों और सर्वे के जरिए इसमें थोड़ा-बहुत और इजाफा हो जाता है, लेकिन फिर भी कर की यह कमाई 25 लाख करोड़ रुपये की उस रकम के मुकाबले खासी कम है, जो छूट के नाम पर प्रदान कर दी जाती है।

टैक्स बचाने की कोशिश
उन्होंने बताया कि चैरिटेबल संस्थाओं को दान के बहाने टैक्स बचाने की कोशिशें अब आयकर विभाग के निशाने पर आ गई हैं। आयकर एक्जंप्शन के नाम पर भारी रकम का फायदा लिये जाने पर ही इस साल आयकर का फोकस होगा। दरअसल जितनी बड़ी रकम कल्याणकारी कार्यों के लिए छोड़ी जा रही है, उतने से स्थितियां बदल जानी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि एक साल के भीतर प्रदेश में आयकर संग्रह में करीब नौ हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। आयकर विभाग ने छूट देने वाली प्रदेश की दो संस्थाओं के कामकाज में गड़बड़ी पकडऩे के बाद उनसे 864 करोड़ रुपये का टैक्स जमा कराया है। इसमें पूर्वी प्रदेश से 364 करोड़ और पश्चिमी प्रदेश से 500 करोड़ रुपये की रिकवरी एसेसमेंट के बाद की गई है। इन संस्थाओं का पंजीकरण निरस्त कराया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि चार्टर्ड एकाउंटेंट की गलती पाई गई तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।

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