-विवेक तिवारी हत्याकांड के बाद सिपाहियों के बगावती सुर को दबाने की कवायद तेज

-रिजर्व पुलिस लाइंस में शुरू हुआ 200 सिपाहियों का 12 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर

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LUCKNOW

विवेक तिवारी हत्याकांड के बाद पुलिसकर्मियों के तेज हुए बगावती सुर को दबाने की कवायद शुरू हो गई है. सोमवार को डीजीपी खुद सिपाहियों का हौसला बढ़ाने के लिये आगे आए. रिजर्व पुलिस लाइंस में आज से शुरू हुए 12 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का उन्होंने उद्घाटन किया और सिपाहियों से पुलिस की विश्वसनीयता बढ़ाने का आह्वान किया. साथ ही साथ डीजीपी ने पुलिसकर्मियों को नसीहत भी दी कि अगर कुछ भी गलत हुआ तो वह छिप नहीं सकता. इसलिए सभी को समाज के हित में काम करने के लिये जुट जाना चाहिये.

दिक्कतों को माना

डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि वर्दी की अहमियत घट-बढ़ रही है. कमी सब में है चाहे वह कोई भी हो. अगर हम कमियां ही इंगित करते रहे तो देश आगे नहीं बढ़ेगा. बोले, कम गलतियां कैसे हों ये सोचना होगा. गाड़ी चेकिंग करते समय क्या प्रक्रिया होनी चाहिए, इसे समझें.पुलिस लाइन में 200 सिपाहियों की 12 दिवसीय ट्रेनिंग कार्यक्रम में डीजीपी ने पुलिसकर्मियों को नसीहत भी दी. कहा, वर्तमान परिवेश में कुछ छिपा नहीं है. आप कुछ भी कर लो वह सामने आ ही जाएगा. मीडिया और सोशल मीडिया सब देख रही है. समाज की हमसे क्या अपेक्षा है, इसे देखना होगा. पीडि़तों से कैसे बात कर रहे हैं? इसका ध्यान रखें. परिवार से परेशान होकर कोई व्यक्ति थाने आता है और वहां पीडि़त को मदद न मिले तो फिर उसे निराशा ही मिलेगी. ऐसी स्थिति न आए. कहा कि, पुलिसकर्मी बहुत काम करते हैं. मैने देखा है सिपाहियों को लगातार 24 घंटे काम करते हुए. कितनी भी अच्छी ट्रेनिंग कर लें, कोई न कोई गलती कर ही देगा.

उत्कृष्ट कार्य वाले सिपाहियों का जिक्र

डीजीपी ने सहारनपुर के सिपाही का उदाहरण देते हुए कहा कि एक सिपाही अपनी बेटी की मौत के गम को भूलकर दूसरे की जान बचाता है. इस घटना पर मैने फिल्म बनवाई और सिपाही को कमंडेशन डिस्क देकर सम्मानित किया. फर्रुखाबाद में सिपाही ने एक व्यक्ति की खोया हुआ कीमती सामान वापस दिलाया, जो पीडि़त ने बेटी की शादी के लिए बचाकर रखा था. वहीं राजधानी में अपना खून देकर सिपाही ने बच्ची की जान बचाई. ऐसे हैं हमारे जवान. आप सब भी समाज में भरोसा कायम करें.

कार्यशैली में सुधार और शस्त्रों पर फोकस

एडीजी जोन राजीव कृष्ण ने बताया कि सिपाही हमारी ताकत हैं. इस प्रशिक्षण से वह खुद को रीचार्ज महसूस करेंगे और बेहतर प्रदर्शन करेंगे. एडीजी के मुताबिक राजधानी के बाद जोन के सभी जिलों में और फिर पूरे प्रदेश में यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी. प्रशिक्षण लेने वालों में 2006 बैच से अब तक के सिपाही शामिल हैं. सिपाहियों को व्यवहार परिवर्तन, कार्यशैली में सुधार और शस्त्रों के बारे में प्रशिक्षित करने के अलावा भीड़ नियंत्रण सिखाया जाएगा.