क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : झारखंड में मासूम बचपन महानगरों की अंधी गलियों में गुम हो रहा है . इन मासूमों को खोजना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार साल में झारखंड की कुल 1005 लापता बच्चियों में से 556 बच्चियों को खोजा जा चुका है, जबकि 449 बच्चियां आज भी ट्रेसलेस हैं. साल 2014 से लेकर 2017 तक राज्य से 1987 बच्चे लापता हुए हैं जिनमें से 982 लड़के और 1005 लड़कियां शामिल थीं.

सीआईडी को जिम्मा

झारखंड में लापता बच्चों को खोजने का जिम्मा अपराध अनुसंधान विभाग यानी कि सीआईडी का है, लेकिन सीआईडी भी लापता बच्चों को ढूंढने में नाकाम साबित हो रही है. झारखंड से हर साल हजारों की संख्या में रोजी रोजगार के लिये बच्चों का पलायन होता है, उनमें से कई बच्चे घर नहीं लौट पाते हैं. 2015 में सीआईडी ने 'ऑपरेशन समाधान' और 'ऑपरेशन मुस्कान' अभियान चलाया था जिसमें कई बच्चों को दिल्ली, मुम्बई और पंजाब के शहरों से बच्चों को ट्रेस किया था और उनको वापस उनके परिजनों से मिलवाया था. फिर भी, कई लड़के और लड़कियां आज भी ट्रेसलेस हैं जिनका पता सीआईडी नहीं लगा पाई है.

बच्चों की खोज को लेकर चले ऑपरेशन

ऑपरेशन स्माइल -1

एक जनवरी से 15 मई 2015 तक झारखंड के 625 बच्चे और अन्य राज्यों से 153 बच्चे खोजे गये.

ऑपरेशन स्माइल -2

1 जनवरी से 9 फरवरी 2016 तक ऑपरेशन चला जिसमें झारखंड के 373 और अन्य राज्यों के 111 बच्चे खोजे गये.

ऑपरेशन स्माइल-3

एक जुलाई से 31 जुलाई 2017 तक झारखंड के 249 और अन्य राज्यों के 72 बच्चे खोजे गये.

ऑपरेशन मुस्कान-1

एक जुलाई से 9 फरवरी 2016 तक ऑपरेशन चलाया गया जिसमें 560 बच्चे खोजे गये .

ऑपरेशन मुस्कान-2

एक जुलाई से 31 जुलाई 2017 तक ऑपरेशन चलाया गया जिसमें 432 बच्चे खोजे गए.

किस साल कितने बच्चे हुए लापता

2014 2015 2016 2017

लापता बच्चे 581 422 723 723

लापता लड़के 285 221 364 112

लापता लड़कियां 296 201 359 149

बरामद बच्चे 343 94 470 179

बरामद लड़के 185 47 226 72

बरामद लड़कियां 158 47 244 107

ट्रेसलेस 238 328 253 82