क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : सरकार और उच्चाधिकारियों के आदेश को ताक पर रख कई अंचलों में अंचल अधिकारियों ने जमीन माफियाओं के पक्ष में कई फाइलें दबा रखी हैं. इन्हीं फाइलों के बीच दबी है गायब होने वाले तालाबों से संबंधित डिटेल्स. जिले के पूर्व डीसी मनोज कुमार ने सभी अंचल अधिकारियों को पत्र लिखकर तालाबों पर हुए अतिक्रमण की जानकारी मांगी थी. उन्होंनेअतिक्रमण करने वाले लोगों के संबंध में भी पूरी डिटेल देने का फरमान जारी किया था. लेकिन, कई अंचल अधिकारियों ने तत्कालीन डीसी के आदेश के बाद भी तालाबों से जुड़े फाइलों को ओपन नहीं किया है.

चार बार पत्र, नहीं मिला जवाब

पूर्व डीसी मनोज कुमार ने इस बाबत चार बार पत्र लिखा, लेकिन अंचल अधिकारियों का जवाब नदारद ही रहा. इस बीच मनोज कुमार का तबादला रांची से गिरिडीह के डीसी के रुप में हो गया. हालांकि, वर्तमान डीसी आर महिमापत रे ने भी दो बार इसकी रिपोर्ट तलब की, लेकिन किसी अंचलअधिकारी ने तालाबों के अतिक्रमण के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है. इधर, मनोज कुमार को रांची नगर निगम का नगर आयुक्त बनाया गया है. ऐसे में तालाबों के अतिक्रमण से जुड़ी फाइलों को फिर से खंगालने की तैयारी चल रही है.

डीसी ने सीओ को कब-कब भेजी चिट्ठी

11 जनवरी 2017

6 फरवरी 2017

11 सितम्बर 2017

2 फरवरी 2018

किन अंचल अधिकारियों को भेजा गया पत्र

शहर सीओ

हेहल

बड़गाईं

अरगोड़ा

नामकुम

नगड़ी

कांके

तालाब की जमीन पर बहुमंजिली इमारतें

डीसी मनोज कुमार ने अपने पत्र के जरिए अंचलाधिकारियों से यह जानना चाहा था कि किन-किन तालाबों का अतिक्रमण कर बहुमंजिली इमारतें खड़ी की गई हैं. इनमें कौन-कौन शामिल हैं. लेकिन, अंचल अधिकारियों ने इससे जुड़ी फाइल डीसी को उपलब्ध कराना मुनासिब नहीं समझा. ऐसे में तालाबों का अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कोई ठोस एक्शन नहीं हो पा रहा है.

जमीन माफियाओं के दबाव में दब गईं फाइलें

जमीन माफिया धड़ल्ले से तालाबों का अतिक्रमण कर उसका नाजायज सौदा कर रहे हैं. तालाब की फाइल दबाए जाने से जमीन माफियाओं के इस कार्य में संबंधित क्षेत्र के अंचल अधिकारियों की संलिप्तता भी प्रमाणित हो रही है. जानकार बताते हैं कि बिना अंचल को मैनेज किए तालाब अतिक्रमण का खेल नहीं खेला जा सकता है.