पिछली तिमाही में 5.7 फीसदी था स्‍तर
देश की अर्थव्‍यवस्‍था की रफ्तार अब थोड़ा स्‍लो हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक वित्‍त वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) 5.3 परसेंट रहा, जबकि इससे पिछली तिमाही में जीडीपी का स्‍तर 5.7 परसेंट था. वहीं सालाना आधार पर जीडीपी की ग्रोथ 5.2 परसेंट पर पहुंच गई है.

गिरता जा रहा ग्रॉफ
मोदी सरकार ने देश की अर्थव्‍यवस्‍था को सुधारने के लिये मेक इन इंडि‍या का मेगा प्‍लान तो बना लिया है. हालांकि इस प्‍लॉन से काफी कुछ बदलाव भी हो सकता है, लेकिन देश की मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर की स्थिति देखकर संदेह भी होने लगता है. मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर की बात करें तो इसके हालत ति‍माही दर ति‍माही खराब होते जा रहे है. वित्त वर्ष 2015 की जुलाई-सितंबर तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 3.5 फीसदी से घटकर 0.1 परसेंट रही. फिलहाल जीडीपी की सुस्‍त रफ्तार को देखते हुए एक्‍सपर्ट का कहना है कि‍ अब रि‍जर्व बैंक ऑफ इंडि‍या (आरबीआई) पर ब्‍याज दरों में कटौती करने का दबाव बन सकता है.

सेक्‍टर के हि‍साब से क्‍या है हाल
मैन्‍युफैक्‍चरिंग : वि‍त्‍त वर्ष 2015 की जुलाई-सितंबर तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 3.5 परसेंट से घटकर 0.1 परसेंट रही. जबकि इससे पहले वित्त वर्ष 2014 की दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 1.3 परसेंट रही थी. इसके अलावा तिमाही आधार पर दूसरी तिमाही में फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर की ग्रोथ 10.4 परसेंट से घटकर 9.5 परसेंट रही. वहीं अब अगर माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ 2.1 परसेंट से घटकर 1.9 परसेंट रही. तिमाही आधार पर दूसरी तिमाही में कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ 4.8 परसेंट से घटकर 4.6 परसेंट रही.

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