श्रीहरिकोटा (पीटीआई/आईएएनएस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज पीएसएलवी-सी46 से रडार इमेजिंग अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (आरआईसैट-2बी) को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित किया। सुबह करीब पांच बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से लॉन्च किया गया। 44.4 मीटर लंबे और 190 टन वजनी पीएसएलवी रॉकेट ने 615 किलोग्राम वजनी आरआईसैट-2बी को लेकर आकाश की तरफ उड़ान भरी। पीएसएलवी-सी46 ने पहले लॉन्च पैड से लिफ्ट बंद होने के लगभग 15 मिनट 25 सेकंड बाद आरआईसैट-2बी को 555 किलोमीटर की कक्षा में इंजेक्ट किया।

तस्वीरों का उपयोग निगरानी के लिए होगा इसरो ने नहीं की पुष्टि
इसरो ने आरआईसैट-2बी के सफल प्रक्षेपण पर कहा कि टेलीमेट्री ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क ने सैटेलाइट का नियंत्रण कर लिया है। आरआईसैट-2बी के सौर सरणियों को स्वचालित रूप से और इसरो टेलीमेट्री ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क को बेंगलुरु में तैनात किया गया। साथ ही इसरो का कहना है देश का यह नया निगरानी सैटेलाइट अच्छी और स्पष्ट तस्वीरें भेजेगा। जिनका उपयोग कृषि, वन विभाग और आपदा प्रबंधन के सहयोग में किया जा सकेगा। माना जा रह है कि इस सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों का उपयोग निगरानी के लिए भी होगा। हालांकि इसराे ने अधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा।
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इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने सैटेलाइट लाॅन्च पर जताई खुशी
इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने खुशी जताते हुए रॉकेट पर सवार किए गए रॉकेट में पिगी बैक पेलोड के लिए शामिल टीम के प्रयासों की सराहना की। लॉन्चिंग में पहली बार भारत में बने विक्रम प्रोसेसर का प्रयोग किया गया है। ये प्रोसेसर भविष्य के रॉकेट में उपयोग किए जाएंगे। इसके साथ ही सिवन ने कहा कि इसी साल 9-16 जुलाई को प्रमुख मिशन चंद्रयान-2 या दूसरा चंद्र मिशन होगा। इसके अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा सामरिक क्षेत्रों के लिए सैटेलाइटों की मांग बढ़ गई है। ऐसे लगभग छह/सैटेलाइटों को बनाने का प्लान है।

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