कानपुर। ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया को हराने पर विराट कोहली की तारीफ जरूर करनी चाहिए। विराट ने वो काम किया जो पिछले 71 सालों से कोई भारतीय कप्तान नहीं कर पाया। मगर ऐसे में उन पूर्व भारतीय कप्तानों को भी याद कर लें जिन्होंने एक समय अजेय ऑस्ट्रेलिया को हराकर उनका घमंड दूर किया था। जी हां हम बात कर रहे सौरव गांगुली और अनिल कुंबले की। जब पूरी दुनिया में किसी टीम का कप्तान ऑस्ट्रेलिया को नहीं हरा पा रहा था तब गांगुली और कुंबले ने मिलकर दो बार ऑस्ट्रेलिया का विजय रथ रोका। आइए जानें उन दो ऐतिहासिक मैचों की कहानी..

जब सौरव गांगुली ने लगाया ऑस्ट्रेलिया की जीत पर विराम -
india vs australia series: पहले गांगुली फि‍र कुंबले रोक चुके हैं टेस्‍ट क्रिकेट में ऑस्‍ट्रेलिया का विजय रथ
लगातार 16 मैच जीत चुकी थी ऑस्ट्रेलिया

साल 2001 की बात है, ऑस्‍ट्रेलियाई टीम भारत दौरे पर थी। टीम भी ऐसी-वैसी नहीं उस वक्‍त की सबसे खतरनाक मानी जाने वाली। यानी कि वो कंगारु टीम किसी का शिकार कर ले तो उसके चंगुल से छूट पाना काफी मुश्‍किल हो जाता था। इसकी वजह थे ऑस्‍ट्रेलियन टीम के धुरंधर खिलाड़ी, पोटिंग, गिलक्रिस्‍ट, स्‍टीव वॉ, मार्क वॉ, मैथ्‍यू हेडन और शेन वार्न। इन खिलाड़ियों की वजह से ऑस्ट्रेलिया लगातार 15 टेस्ट मैच जीत चुकी थी। अब बारी थी भारत से मुकाबले की। उस वक्त भारतीय टीम की कमान सौरव गांगुली संभाल रहे थे और 2001 में दोनों देशों के बीच तीन मैचों की टेस्ट सीरीज खेली गई। सीरीज का पहला टेस्ट मुंबई में हुआ जहां मेहमान कंगारुओं ने 10 विकेट से जीत मिली। अब ऑस्ट्रेलिया लगातार 16 टेस्ट मैच जीत चुका था। अगला मुकाबला दादा (गांगुली) के घर कोलकाता में खेला गया। सौरव का लगा यहां नहीं जीत पाए तो ऑस्ट्रेलिया का रोकना नामुमकिन हो जाएगा।

क्‍या हुआ था भारत-ऑस्‍ट्रेलिया के इस मैच में
11 मार्च को शुरु हुए दूसरे टेस्‍ट में ऑस्‍ट्रेलियाई कप्‍तान ने टॉस जीतकर पहले बल्‍लेबाजी का निर्णय लिया। हालांकि यह डिसीजन सही साबित हुआ। ऑस्‍ट्रेलिया ने पहली पारी में कप्‍तान स्‍टीव वॉ के शतक की बदौलत 445 रन बनाए। अब बारी थी भारतीय बल्‍लेबाजों के पराक्रम की मगर कंगारु गेंदबाजों के सामने सभी बल्‍लेबाज बेबस नजर आए। वीवीएस लक्ष्‍मण को छोड़ दिया जाए तो किसी भी भारतीय बल्‍लेबाज का बल्‍ला नहीं चला। लक्ष्‍मण के बेहद उपयोगी 59 रन की बदौलत भारत का पहली पारी में स्‍कोर 171 बना। यानी कि पहली पारी में भारत 274 रन पिछड़ गया और फॉलोआन खेलने की नौबत आ गई।
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नहीं तोड़ पाए भारत की दीवार
दूसरी पारी में भारत के दोनों ओपनिंग बल्‍लेबाज 70 रन पर चलते बने। सभी को लगा ऑस्‍ट्रेलियाई गेंदबाज फिर से भारत को सस्‍ते में समेट देंगे और यह मैच पारी के अंतर से अपने नाम करेंगे। मगर पिच्‍चर अभी बाकी थी, क्रीज पर आए वीवीएस लक्ष्‍मण और सचिन तेंदुलकर, दोनों ने पारी को आगे बढ़ाया। लेकिन उस दिन किस्‍मत सचिन के साथ नहीं थी और वह 10 रन पर आउट हो गए। इसके बाद गांगुली बैटिंग करने आए लेकिन वो भी 48 रन पर चलते बने। भारतीय टीम विकेटों के इस पतझड़ को रोकने के लिए दीवार की जरूरत थी और हुआ भी वही। 'द वॉल' नाम से मशहूर राहुल द्रविड़ अब क्रीज पर आ चुके थे, उधर लक्ष्‍मण धीरे-धीरे अपनी पारी को आगे बढ़ा रहे थे।

इन दो खिलाड़ियों ने खेली थी 'वैरी वैरी स्‍पेशल' इनिंग
लक्ष्‍मण-द्रविड़ जब बल्‍लेबाजी कर रहे थे तब भारत का स्‍कोर 232 रन पर 4 विकेट था। मगर उसके बाद इन दोनों बल्‍लेबाजों ने ऐसी बल्‍लेबाजी की कि पूरा चौथा दिन गुजर गया, मगर कोई भी कंगारु गेंदबाज लक्ष्‍मण-द्रविड़ का विकेट नहीं गिरा सका। लक्ष्‍मण ने इस पारी में 281 रन बनाए जबकि द्रविड़ 180 रन बनाकर पवेलियन लौटे। यही वो दिन था, जिसके बाद वीवीएस लक्ष्‍मण को 'वेरी वेरी स्‍पेशल' कहा जाने लगा। भारत ने अपनी दूसरी पारी 657 रन पर घोषित कर दी। अब ऑस्‍ट्रेलिया को जीत के लिए 384 रन की जरूरत थी। मगर पूरी कंगारू टीम दूसरी इनिंग्‍स में 212 रन पर ऑलआउट हो गई और भारत यह मैच 171 रन से जीत गया। इसी के साथ गांगुली ने ऑस्ट्रेलिया के लगातार टेस्ट जीत पर विराम लगा दिया।

जब अनिल कुंबले ने रोका ऑस्ट्रेलिया का विजय रथ -
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लगातार 20 मैच जीत चुकी थी ऑस्ट्रेलिया
भारत ने ऑस्ट्रेलिया के विजय रथ में दूसरी बार ब्रेक साल 2008 में लगाया था। उस वक्त कंगारु टीम की कमान रिकी पोंटिंग के हाथों में थी और ये टीम लगातार 18 टेस्ट मैच जीत चुकी थी। भारत तब चार मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने ऑस्ट्रेलिया गया और टीम इंडिया के कप्तान अनिल कुंबले थे। कुंबले की अगुआई में भारतीय टीम को मेलबर्न और सिडनी में खेले गए दो टेस्ट मैचों में हार मिली। इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया ने लगातार 20 टेस्ट मैचों में जीत हासिल कर ली थी। पोंटिंग की नजर रिकाॅर्ड 21वीं टेस्ट जीत पर थी। सीरीज का तीसरा मुकाबला पर्थ में खेला गया। कुंबले ने टाॅस जीतकर पहले बैटिंग का निर्णय लिया और पूरी भारतीय टीम 330 रन पर ऑलआउट हो गई। भारत की तरफ से सबसे ज्यादा 93 रन राहुल द्रविड़ ने बनाए। वहीं सचिन ने 71 रन की पारी खेली। कंगारुओं को लगा कि उन्होंने भारत का सस्ते में सिमेटकर मैच में मजबूत पकड़ बना ली। मगर अभी भारतीय गेंदबाजों का मैदान में आना बाकी थी। उस दिन इंडिसन पेसर्स ने ऐसी धारदार गेंदबाजी की कंगारु बल्लेबाज पिच पर ज्यादा देर टिक नहीं पाए, पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम 212 रन पर ढेर हो गई। इसमें छह बल्लेबाज तो दहाई का अंक भी नहीं छू सके।
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भारत को मिली रोमांचक जीत
पहली पारी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के सस्ते में सिमट जाने के बाद मैच रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका था। अब मैच का नतीजा उसी के पक्ष में जाना था जो दूसरी इनिंग में शानदार गेंदबाजी करें। खैर भारत की बल्लेबाजी आई। इस बार भी टीम इंडिया बड़ा स्कोर खड़ा करने में नाकाम रही। पूरी भारतीय टीम सेकेंड इनिंग में 294 रन पर ऑलआउट हो गई। अब आखिरी पारी में कंगारुओं को जीत के लिए 413 रन चाहिए थे। अपने घर में मेजबान टीम के लिए यह लक्ष्य असभंव तो नहीं था मगर इसे मुश्किल बना दिया भारतीय गेंदबाजों ने। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी 340 रन पर सिमट गई और भारत यह मैच 72 रन से जीत गया। इसी के साथ पोंटिंग का लगातार 21 टेस्ट जीत का सपना भी टूट गया।

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