कानपुर। इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट हारने के बाद विराट कोहली एंड टीम को अगली चुनौती लॉर्ड्स मैदान पर मिलने वाली है। दूसरा टेस्ट मैच 9 अगस्त से शुरु होगा। मेजबान इंग्लैंड इस सीरीज में 1-0 की बढ़त बना चुका है। ऐसे में विराट लॉर्ड्स में जीत दर्ज कर सीरीज में बराबर आना चाहेंगे, हालांकि टीम इंडिया के लिए यह आसान काम नहीं होगा। ईएसपीएन क्रिकइन्फो के डेटा के मुताबिक, भारत ने यहां कुल 17 टेस्ट खेले हैं जिसमें कि 11 मैचों में उन्हें करारी हार मिली तो दो मैच उनके नाम रहे। वहीं 4 टेस्ट ड्रा रहे।

1986 में मिली थी पहली जीत
1986 में भारतीय टीम जब इंग्‍लैंड दौरे पर गई थी। तो पहले ही टेस्‍ट मैच में ऐसी अप्रत्‍याशित जीत मिल जाएगी यह किसी ने नहीं सोचा था। क्रिकइन्फो के डेटा के मुताबिक, इस मैच में इंग्‍लिश टीम ने पहली पारी में 294 रन बनाए थे। जिसके जवाब में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी 341 रन पर समाप्‍त की। इसके बाद इंग्‍लैंड के बल्‍लेबाज दूसरी पारी में 180 रन पर ही सिमट गए। ऐसे में भारत के पास मैच जीतने का बेहतरीन मौका था और उन्‍होंने दूसरी इनिंग्‍स में 5 विकेट खोकर 136 रन का लक्ष्‍य हासिल कर लिया और इतिहास रच दिया।
कई दशक बीत जाते हैं तब लार्ड्स में मिलती है जीत,यहां भारत सिर्फ दो बार जीता है
फिर 28 साल बाद मिली जीत
साल 1986 में पहली जीत मिलने के बाद भारत को दूसरी जीत के लिए 28 साल इंतजार करना पड़ा। कप्तान एमएस धोनी की अगुआई में भारत ने लॉर्ड्स में दूसरी जीत 2014 में हासिल की थी। लॉर्ड्स में भारत को दूसरी बार जीत दिलाने वाले हीरो अजिंक्य रहाणे थे। तब रहाणे को टेस्ट खेले सिर्फ एक साल हुआ था मगर सेलेक्टर्स ने उनके ऊपर भरोसा जताया और टीम में रख लिया। पांच मैचों की इस सीरीज में पहला मैच मेहमान भारत के नाम रहा। दूसरा मैच लंदन के लॉडर्स में खेला गया। यह वही मैदान था जहां भारत पिछले 28 सालों में कोई मैच नहीं जीत पाया। मगर उस दिन इतिहास रचने जा रहा था, भारत की तरफ से रहाणे को छोड़ कोई भी बल्लेबाज शतक नहीं लगा पाया। रहाणे के दम पर भारत ने यह मैच 95 रन से जीतकर पिछले 28 सालों का सूखा खत्म कर दिया। इस जीत का पूरा श्रेय रहाणे को मिला।

सिर्फ दो बार ही मिली है जीत

भारत ने लॉर्ड्स में आज तक सिर्फ दो टेस्‍ट मैच ही जीते हैं। पहला टेस्‍ट मैच 1986 में और दूसरा 2014 में। लेकिन इन दोनों जीत में कई बातें ऐसी थीं जो कॉमन रहीं।

1. 1986 में इंडियन टीम के कप्‍तान कपिल देव थे, तो 2014 में महेंद्र सिंह धोनी। लेकिन इसमें सबसे खास बात यह है कि दोनों वर्ल्‍डकप विनिंग कप्‍तान रहे हैं।

2. 1986 में जहां चेतन शर्मा ने 5 विकेट लिए थे, तो 2014 में ईशांत शर्मा ने 5 विकेट झटके।

3. 1986 की टीम में रोजर बिन्‍नी थे, तो 2014 की टीम में स्‍टुअर्ट बिन्‍नी शामिल थे।

4. दोनों ही जीत में भारतीय टीम का एक ओपनर चेन्‍नई से था। 1986 में के.श्रीकांत तो 2014 में मुरली विजय।

5. इन दोनों जीत में मुंबई के बल्‍लेबाज ने शतक जड़ा था। 1986 में दिलीप वेंगसरकर तो 2014 में यह कमाल अजिंक्‍य रहाणे ने किया।

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