कानपुर। भारत बनाम इंग्लैंड के बीच टेस्ट में बेस्ट की जंग होने में बस दो दिन बाकी हैं। बुधवार को एजबस्टन में दोनों टीमें पहला टेस्ट खेलेंगी। वनडे सीरीज हारने के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली टेस्ट में बेस्ट जरूर देना चाहेंगे।  इंग्लैंड में टेस्ट रिकॉर्ड की बात करें तो भारत ने अब तक यहां कुल 17 टेस्ट सीरीज खेली हैं जिसमें सिर्फ तीन में उन्हें जीत मिली जबकि 13 बार हार का सामना करना पड़ा हैं। वहीं एक सीरीज ड्रा रही। बतौर कप्तान विराट का यह पहला इंग्लैंड दौरा है हालांकि वह वनडे में जीत के साथ खाता तो नहीं खोल पाए मगर टेस्ट में अपने नाम एक नायाब रिकॉर्ड जरूर बनाना चाहेंगे। वैसे इंग्लिश धरती पर भारतीय बल्लेबाजों का रिकॉर्ड देखें तो वो 5 पारियां याद आती हैं जो वाकई अनोखी थीं।

नवाब पटौदी ने एक आंख से जड़ दिया शतक
पूर्व भारतीय कप्तान मंसूर अली खान पटौदी एक बेहतरीन बल्लेबाज माने जाते थे। साल 1967 में लीड्स में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई उनकी शानदार शतकीय पारी को कौन भूल सकता है। 60-70 के दशक में इंग्लैंड को उनके घर पर हराना आसान नहीं था। ईएसपीएन क्रिकइन्फो के डेटा के मुताबिक, 1967 में टीम इंडिया टेस्ट सीरीज खेलने ब्रिटेन गई। हेडिंग्ले में मेहमान और मेजबान टीम आमने-सामने थीं। पहली पारी में भारत 164 रन पर ऑलआउट हो गया था, ऐसे में टीम इंडिया को फॉलोऑन खेलना पड़ा। उस वक्त भारत 386 रन पीछे था, टीम इंडिया पर पारी की हार का खतरा मंडरा रहा था। मगर सेकेंड इनिंग में नवाब पटौदी ने जब 148 रन शानदार पारी खेली तो इंग्लिश बल्लेबाज देखते रह गए। आपको बता दें उस वक्त नवाब पटौदी को सिर्फ एक आंख से दिखता था। 1961 में एक कार एक्सिडेंट में पटौदी की दाईं आंख चली गई थी, इसके बावजूद हेडिंग्ले टेस्ट में पटौदी ने शतक लगाया। खैर भारत यह मैच तो नहीं जीत सका मगर पारी की हार से जरूर बच गए।

गावस्कर का शानदार दोहरा शतक
साल 1979 में टीम इंडिया ओवल में एक टेस्ट मैच खेल रही थी। भारत को आखिरी पारी में जीत के लिए 430 रन की जरूरत थी। तब टीम के ओपनर बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने चेतन चौहान के साथ पहले विकेट के लिए 213 रन की साझेदारी की। चेतन तो आउट होकर चले गए मगर इधर गावस्कर क्रीज पर पैर जमाए खड़े थे। सेकेंड विकेट के लिए उन्होंने 153 रन की पार्टनरशिप की। तब भारत का स्कोर 366 रन पर एक विकेट था। सभी को लगा कि भारत यह मैच आसानी से जीत जाएगा। लिटिल मास्टर ने 221 रन की पारी खेली, मगर उनके आउट होने के बाद मानो विकेटों की लाइन लग गई। टीम के बाकी सदस्य बचे हुए रन नहीं बना सके, जीत के लिए 9 रन बाकी थे कि दिन का खेल समाप्त हो गया और मैच ड्रा रहा।

7 घंटे तक बैटिंग करते रहे द्रविड़

भारत की दीवार कहे जाने पूर्व खिलाड़ी राहुल द्रविड़ ऐसे भारतीय बल्लेबाज हैं जिनका इंग्लैंड में बल्ला खूब चला है। इंग्लिश जमीन पर द्रविड़ के नाम 6 शतक दर्ज हैं इसमें से तीन सेंचुरी तो 2011 सीरीज में ही आईं थीं। द्रविड़ की इंग्लैंड में सबसे यादगार पारी की बात करें तो 2002 में हेडिंग्ले टेस्ट में जब उन्होंने 148 रन बनाए तो यह ऐतिहासिक पारी थी। भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का निर्णय लिया। ओपनर बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के जल्दी आउट हो जाने के बाद तीसरे नंबर पर द्रविड़ बल्लेबाजी करने आए। नई गेंद का द्रविड़ ने बहुत अच्छे से सामना किया। करीब 7 घंटे से ज्यादा बैटिंग कर 148 रन बनाकर द्रविड़ पवेलियन लौटे। इसके बाद का काम तेंदुलकर और गांगुली ने कर दिया। भारत ने पहली पारी 628 रन पर घोषित की और भारत यह मैच जीत गया था।

जब सारे बल्लेबाज हुए फ्लॉप, तब सचिन ने जड़ा शतक
साल 1996 में भारत तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने इंग्लैंड गई थी। पहला मैच बर्मिंघम में खेला गया। भारत की पहली पारी 214 रन पर सिमट गई। इंग्लैंड ने फिर फर्स्ट इनिंग में 313 रन बनाए। ऐसे में भारत पर 99 रन की बढ़त बन चुकी थी। दूसरी पारी में पहले भारत को 99 रन बनाते थे फिर इंग्लैंड के लिए टारगेट सेट करना था। ऐसे में ज्यादा प्रेशर के चलते भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह से ढह गई। कोई भी भारतीय बल्लेबाज पिच पर ज्यादा देर नहीं टिक सका। खैर मास्टर ब्लॉस्टर सचिन तेंदुलकर ने आखिर तक अपना विकेट बचाए रखा और 122 रन की पारी खेली। इस तरह भारत 219 रन बना पाया। पहली पारी के हिसाब से इंग्लैड को मैच जीतने के लिए 121 रन का लक्ष्य मिला जिसे मेजबान ने 2 विकेट खोकर प्राप्त कर लिया।

रहाणे ने भारत को 28 साल बाद दिलाई जीत
टेस्ट डेब्यू में फेल होने के बावजूद रहाणे ने भारत के लिए वो कर दिखाया जो 28 साल तक कोई भारतीय बल्लेबाज नहीं कर सका। ईएसपीएन क्रिकइन्फो के डेटा के मुताबिक, 2014 में भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर गई थी। तब रहाणे को टेस्ट खेले सिर्फ एक साल हुआ था मगर सेलेक्टर्स ने उनके ऊपर भरोसा जताया और टीम में रख लिया। पांच मैचों की इस सीरीज में पहला मैच मेहमान भारत के नाम रहा। दूसरा मैच लंदन के लॉडर्स में खेला गया। यह वही मैदान था जहां भारत पिछले 28 सालों में कोई मैच नहीं जीत पाया। मगर उस दिन इतिहास रचने जा रहा था, भारत की तरफ से रहाणे को छोड़ कोई भी बल्लेबाज शतक नहीं लगा पाया। रहाणे के दम पर भारत ने यह मैच 95 रन से जीतकर पिछले 28 सालों का सूखा खत्म कर दिया। इस जीत का पूरा श्रेय रहाणे को मिला।

जिस मैदान पर लगातार 28 साल तक हारा भारत, वहां रहाणे ने शतक लगाकर दिलाई थी जीत

जब इंग्लैंड के एक खिलाड़ी ने मैदान में तोड़ दी थी गावस्कर के पैर की हड्डी

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