आरयू कैंपस के नेहरू केन्द्र बिल्डिंग में नए सत्र से ओपन होगा प्रज्ञा शोध सेंटर

-देहरादून के गढ़वाल और हल्द्वानी ओपन यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर होगा शोध कार्य

बरेली:

आरयू अब पीजी स्टूडेंट्स को प्राचीन भारतीय मूल संस्कृति की भी जानकारी कराएगा। प्राचीन भारतीय संस्कृति पर शोध कार्य को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश का पहला शोध सेंटर आरयू में नए सत्र से ओपन होने जा रहा है। आरयू कैंपस के नेहरू केन्द्र बिल्डिंग में ब्रजभूमि प्रज्ञा परिषद शोध सेंटर का शुभारंभ किया जाएगा। सेंटर का मेन मकसद होगा स्टूडेंट्स को प्राचीन भारतीय संस्कृति से जोड़ना।

भारतीय सभ्यता से बना रहे दूरी

देहरादून के क्षेत्र संयोजक भगवती राघव ने कहा कि जैसे जैसे समय बीत रहा है लोग अपनी भारतीय संस्कृति को छोड़कर पश्चिमी सभ्यता की ओर जा रहे हैं। जिसका असर हमारे रहन सहन और शोध कायरें पर भी पड़ रहा है। इस शोध सेंटर से भारतीय परिवेश पर आधारित सिलेबस लागू करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में भारतीय छात्र पश्चिमी सभ्यता की ओर अधिक बढ़ रहे हैं। इस कारण स्टूडेंट्स में भारतीय सभ्यता से दूरी बन रही है। इसका सबसे अधिक प्रभाव आरयू के शोध क्षेत्रों पर पड़ा है। चूंकि शोधार्थी अपने क्षेत्र के शोध को छोड़कर दूसरे देशों के शोध कायरें में लगे हैं।

स्टूडेंट्स से मांगा जाएगा थॉट

हाल ही में इसके लिए आरयू में एक सेमिनार भी हुआ था। जिसमें बरेली कॉलेज के डॉ। योगेश कुमार भी शामिल हुए। उन्होंने बताया कि आरयू कैंपस में ओपन होने वाले ब्रजभूमि प्रज्ञा परिषद शोध सेंटर के जरिए पीजी के स्टूडेंट्स को प्राचीन भारतीय संस्कृति को समझने का मौका मिलेगा। इसके लिए स्टूडेंट्स से ही थॉट मांगे जाएंगे। जिसके बाद स्टूडेंट्स को एजुकेशन के साथ शोध का मौका मिलेगा। इसके लिए आरयू के सिलेबस में आवश्यकतानुसार बदलाव किया जाएगा। कई सालों से पुराने सिलेबस के कई बिंदुओं को हटाने की मांग चल रही है लेकिन अभी तक सलेबस बदला नहीं जा सका है।

सेल्फ डिपेंड बनेंगे स्टूडेंट्स

आरयू कैंपस में शोध सेंटर बनने से शोध कायरें को भी नई रफ्तार मिलेगी। तो वहीं स्टूडेंट्स भी सेल्फ डिपेंड बनेंगे। इसके लिए प्रज्ञा की ओर से उत्तराखंड के दो विश्वविद्यालयों के साथ करार किया है। देहरादून के गढ़वाल विवि और हल्द्वानी की ओपन यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर शोध कार्य शुरू किए जाएंगे।