मेलबॉर्न (पीटीआई)। लिबरल कैंडिडेट और इजराइल में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व राजदूत दवे शर्मा अब ऑस्ट्रेलिया के एक सांसद बन गए हैं। इसी तरह वह भारतीय मूल के पहले ऐसे व्यक्ति बन गए हैं, जिन्होंने ऑस्ट्रेलियाई संसद में अपनी एक जगह बनाई है। 43 वर्षीय शर्मा ने वेंटवॉरथिन सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार केरेन फेल्प्स को हराया है। बता दें कि छह महीने पहले ऑस्ट्रेलिया के उपचुनाव में फेल्प्स से हारने वाले शर्मा ने इस बार 51.16 प्रतिशत वोट के साथ वेंटवॉरथिन सीट पर अपनी जीत दर्ज की है। शर्मा ने एक ट्वीट में कहा, 'वेंटवर्थ के लोगों ने मुझपर भरोसा जताया, इसके लिए मैं उनका बहुत आभारी हूं। संसद में मैं उनके लिए जोरों से आवाज उठाऊंगा।' उन्होंने कहा कि वह संसद में जिन तीन मुद्दों पर बहस करेंगे, वे 'राष्ट्रीय सुरक्षा', 'महिला वर्कफोर्स की भागीदारी' और 'ऑस्ट्रेलिया वैल्यू चैन के उच्च अंत पर बना रहे' हैं।

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पिता थे भारतीय और मां थीं ऑस्ट्रेलियाई
बता दें कि 2013 से 2017 तक इजराइल में ऑस्ट्रेलिया के राजदूत रहे शर्मा ने इस सवाल को भी खारिज कर दिया कि क्या उन्हें प्रधानमंत्री मॉरिसन के नए मंत्रिमंडल में स्थान दिया जाएगा। शर्मा ने पूर्व प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल को भी याद किया, जिन्हें उन्होंने 'अच्छा दोस्त' बताया। बता दें कि उपचुनाव में शर्मा के अभियान में मदद नहीं करने के लिए सहयोगियों द्वारा टर्नबुल की खूब आलोचना की गई थी। दवे के पिता एक भारतीय और मां ऑस्ट्रियाई थीं, उनका परिवार 1970 के दशक में सिडनी में बस गया था। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के इस आम चुनाव में 10 से अधिक भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रवासी की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब यहां 700,000 से अधिक भारतीय हो चुके हैं। गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन देश में बहुमत की सरकार बनाने के बहुत करीब हैं। ऑस्ट्रेलियाई चुनाव आयोग का कहना है कि उनका गठबंधन 77 सीटों के साथ आगे चल रहा है। बहुमत के लिए केवल 76 सीटों की जरूरत होती है।

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