कानपुर। भारतीय वायुसेना में एक से बढ़कर एक जांबाज पायलट भर्ती हुए और जरुरत पड़ने पर उन्होंने कारगिल युद्ध में अपनी वीरता का प्रदर्शन दिखाया लेकिन फाइटर पायलट इंद्र लाल रॉय की तुलना किसी से नहीं की जा सकती है। टेलीग्राफ के मुताबिक, जांबाज फाइटर पायलट इंद्र लाल रॉय का जन्म 2 दिसंबर, 1898 को कोलकाता में हुआ था और ये वही फाइटर पायलट हैं, जिन्होंने सिर्फ 19 साल की उम्र में पहले विश्व युद्ध के दौरान दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे। इंद्र लाल भारत के पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें ब्रिटेन के तीसरे सबसे प्रतिष्ठित गैलेंट्री अवॉर्ड डिस्टिंगुइश्ड फ्लाइंग क्रॉस (DFC) से नवाजा गया था।

दस जहाज मार गिराए

फर्स्ट वर्ल्ड वार वेबसाइट के मुताबिक, कलकत्ता में जन्में रॉय की पढाई लंदन में हुई थी और जब वे सिर्फ 19 साल के थे, तभी उनकी अप्रैल 1917 में रॉयल फ्लाइंग कॉर्प्स (ब्रिटिश एयरफोर्स) में नौकरी लग गई थी। उनके टैलेंट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें 3 महीने में ही प्रमोशन कर सेकेंड लेफ्टिनेंट बना दिया गया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पहले विश्व युद्ध में ब्रिटिश सेना की ओर से लड़ते हुए उन्होंने जर्मनी के कई फाइटर प्लेन को तहस महास कर दिया था। कहा जाता है कि रॉय ने 6 से 19 जुलाई , 1918 के बीच यानी महज 13 दिनों के अंदर दुश्मनों के दस जहाज मार गिराए थे। बता दें कि जिन जहाजों पर रॉय ने हमला किया, उनमे से पांच पूरी तरह से नष्ट हो गए, जबकि पांच अन्य काबू से बाहर हो गए।

170 घंटे भरी उड़ान
बता दें कि 13 दिनों के भीतर रॉय ने करीब 170 घंटे उड़ान भरी थी। उनकी वीरता को देखते हुए ब्रिटेन में उन्हें फ्लाइंग ऐस का भी खिताब दिया गया। फ्लाइंग-एस वर्ल्ड-वॉर वन के उन पायलट्स को कहा जाता था जो हवाई लड़ाई में दुश्मन के जहाजों को मार गिराते थे। यह खिताब रॉय को 10वीं जीत के बाद दिया गया था। इसी तरह दुश्मनों से लड़ते हुए रॉय सिर्फ 19 साल की उम्र में ही शहीद हो गए।

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