- जनसूचना अधिकारी व अपीलीय अधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

- सूचना आयुक्त ने सूचना देने और राइट टू प्राइवेसी का ध्यान रखने के दिए निर्देश

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- जनसूचना अधिकारी व अपीलीय अधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

- सूचना आयुक्त ने सूचना देने और राइट टू प्राइवेसी का ध्यान रखने के दिए निर्देश

BAREILLY:

BAREILLY:

'आरटीआई में जनसूचना अधिकारी का मुख्य दायित्व सूचना देना है छिपाना नहीं. रिकॉर्ड में उपलब्ध सूचना देना चाहिए न कि सृजित सूचना. आरटीआई का मकसद है पब्लिक को सूचना मिल सके. अधिकारियों को सूचना न देने का बहाना नहीं ढूंढना चाहिए. शासकीय कार्यो में पारदर्शिता व जवाबदेही तय कर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना ही जन सूचना अधिकार की मूल आत्मा है.' यह बातें राज्य सूचना आयुक्त विजय शंकर शर्मा ने 'जनसूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण' के दौरान कही.

सवा लाख आवेदन निस्तारित

सूचना आयुक्त ने बताया कि सूचना आयोग में फ् वर्ष में करीब सवाल लाख रिकॉर्ड आवेदनों का निस्तारण हुआ है. उन्होंने अधिकारियों को आरटीआई से अवगत कराते हुए बताया कि कार्यालय में किसी प्रकार का मटीरियल जिसकी सूचना मांगी जाए वह दी जानी चाहिए. उसकी सर्टिफाइड कॉपी आवेदक को प्रदान करनी चाहिए. बताया कि काल्पनिक प्रश्नों का उत्तर आरटीआई की सूचना मटीरियल में नहीं आता है, लेकिन विभाग में मौजूद प्रत्येक अभिलेख सूचना के दायरे में आते हैं. बीपीएल आवदेनकर्ता है तो उसे कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा.

सूचना क्या है और क्या नहीं

बताया कि ज्यादा लंबी और औचित्यहीन सूचना जिससे कार्यालय का कार्य प्रभावित हो उसे छूट माना गया है. भ् सौ शब्दों से ज्यादा शब्दों में सूचना मांगी है तो सूचना अधिकारी को अधिकार है कि वह आवेदन पर विचार करे या नहीं. राइट टू प्राइवेसी में देश की सुरक्षा, अखंडता प्रभावित हो, न्यायालय की अवमानना, संसद विधान मंडल के विशेषाधिकार का हनन, व्यापारिक ट्रेड मार्क, आपसी विश्वास के सम्बन्धों का ध्यान रखने के निर्देश दिए. जनसूचना अधिकारियों के सवालों के जवाब दिए. यहां डीएम आर विक्रम सिंह, सीडीओ सत्येन्द्र कुमार, अपर आयुक्त प्रशासन राममूर्ति पांडेय मौजूद रहे.