- 12 दिसंबर से 23 दिसंबर के बीच हुई थी परीक्षा

- 3307 पदों पर होनी थी दारोगाओं की भर्ती

- 6.30 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था

- फिजिकल टेस्ट की बायोमेट्रिक्स जांच में पकड़ में आयी धांधली

- तमाम निगरानी के दावे हुए फेल, अब एफआईआर की तैयारी

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LUCKNOW : बीते दिसंबर माह में दारोगा भर्ती परीक्षा-2016 को सॉल्वर गैंग की छाया से बचाने के दावे हवा-हवाई ही साबित हुए. एसटीएफ की निगरानी और सुरक्षा के तमाम उपाय करने के बावजूद 23 मुन्ना भाई अपनी जगह दूसरों से परीक्षा दिलाकर पास होने में सफल हो गए. हालांकि, फिजिकल टेस्ट में हुई बायोमेट्रिक्स जांच में उनकी एक न चली और उनकी करतूत का खुलासा हो गया. अब पुलिस भर्ती बोर्ड ऐसे अभ्यर्थियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में है.

दिसंबर में हुई थी परीक्षा

यूपी पुलिस की दारोगा भर्ती परीक्षा-2016 की तमाम बाधाओं को दूर करने के बाद बीती 12 दिसंबर से 23 दिसंबर के बीच परीक्षा आयोजित की गई थी. 3307 पदों के लिये कुल 6.30 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. पिछली परीक्षाओं में हुई धांधली को देखते हुए तमाम सावधानियां बरती गई थीं. सॉल्वर गैंग की छाया से परीक्षा को बचाने के लिये इसकी निगरानी को यूपी एसटीएफ को लगाया गया था. परीक्षा समाप्ति के बाद यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड ने फुलप्रूफ परीक्षा का दावा किया था. हालांकि, उसका यह दावा खरा साबित नहीं हुआ.

बायोमेट्रिक्स जांच में खुलासा

परीक्षा के दौरान सभी अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक्स (फिंगर प्रिंट) लिया गया था. परीक्षा में पास हुए अभ्यर्थियों को एक जुलाई से फिजिकल टेस्ट के लिये अलग-अलग जिलों में बुलाया गया था. इस दौरान उनका एक बार फिर बायोमेट्रिक्स लिया गया. हालांकि, इस बार बायोमेट्रिक्स के दौरान 141 अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक्स परीक्षा के दौरान लिये गए बायोमेट्रिक्स से मिलान नहीं हुआ. इन अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक्स की दोबारा बुलाकर जांच की गई तो 108 अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक्स मिलान हो गया. बाकी बचे 33 अभ्यर्थियों को एक बार फिर बुलाया गया. पर, इस बार इनमें से सिर्फ 17 अभ्यर्थी ही पहुंचे. जांच में इनमें से सिर्फ 10 अभ्यर्थियों का मिलान हो पाया और 7 अभ्यर्थियों का मिलान नहीं हो सका.

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दर्ज होगी एफआईआर

भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष जीपी शर्मा ने बताया कि जांच में फेल हुए 7 व बुलावे के बावजूद नदारद रहे 16 यानि कुल 23 अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक्स मिलान न होने की वजह से इस बात की पुष्टि हो गई है कि उन अभ्यर्थियों की जगह किसी दूसरे ने परीक्षा दी. इसे देखते हुए इन सभी 23 अभ्यर्थियों के संबंधित जिलों की पुलिस को एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है.