45 रुपये प्रति महीने की पहली नौकरी
लक्ष्‍मणराव किर्लोस्‍कर का जन्‍म 20 जून 1869 को महाराष्‍ट्र के एक छोटे से गांव गुरलौहसुर में हुआ था। उन्हें मैकेनिकल सामान और पेंटिंग से बहुत लगाव था पर वे कलर ब्लाइंड थे तो पेंटिंग छोड़ दी पर मैकेनिकल ड्रॉइंग का पढ़ाई जारी रखी। शुरुआती दिनों में 45 रुपये प्रतिमाह पर विक्टोरिया जुबली टेक्निकल इंस्टीट्यूट में बतौर असिस्टेंट टीचर काम करते थे। यहां पर उन्‍होंने काफी समय तक काम किया। बाद में उन्‍हें लगा कि नौकरी से बेहतर कुछ करना होगा, बस फिर क्‍या था मैकेनिकल की डिग्री पाने वाले लक्ष्‍मणराव खुद का बिजनेस खोलने निकल पड़े।

साइकिल की छोटी सी दुकान से 10 हजार करोड़ रुपये के कारोबार तक
साइकिल रिपेयर की खोली दुकान
लक्ष्‍मणराव ने सबसे पहले बेलगांव में साइकिल रिपेयर की दुकान खोली। यह दुकान काफी छोटी थी, लेकिन लक्ष्‍मणराव ने पूरी मेहनत और लगन से इस दुकान को आगे बढ़ाया। जिस रोड पर यह दुकान थी, उसे आज किर्लोस्कर रोड कहते हैं। इसके बाद उन्‍होंने खेती के उपकरण बनाने पर जोर दिया। शुरुआत में उनके प्रोड्क्‍ट को किसानों से सिरे से खारिज कर दिया था। किसानों का कहना था कि किर्लोस्‍कर का लोहे का हल खेत को नुकसान पहुंचाता है। लक्ष्‍मणराव को अपना यह पहला प्रोड्क्‍ट बेचने में 2 साल लग गए थे।

आज है 10 हजार करोड़ का कारोबार

एक बड़े बिजनेसमैन होने के साथ-साथ लक्ष्‍मणराव बड़े समाज सुधारक भी थे। उन्‍होंने अछूत के विरोध में खूब काम किया। बताते तो यह भी हैं कि उन्होंने पूर्व कैदियों को अपने यहां नाइट वॉच मैन की नौकरी दी थी। 1888 में शुरू हुई हुए किर्लोस्कर ग्रुप का उस समय नाम किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड था। लक्ष्मणराव किर्लोस्कर के नेतृत्व में इस कंपनी को भारी सफलता मिली। आज किर्लोस्कर ग्रुप पंप, इंजन, वाल्व और कंप्रेसर की इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग करता है। इस कंपनी में करीब 28,000 कर्मचारी कार्यरत हैं और इनकी कुल आमदनी है 2.50 बिलियन डॉलर है।

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