इंटरनेशनल यूथ डे

यंग एट हार्ट---- थीम

उम्र, मन और सोच कभी बूढ़े नहीं होते. इस लाइन को इंटरनेशनल यूथ डे पर सच साबित किया है शहर के चार बुजुर्गो ने. हम भले ही उन्हें बुजुर्ग मानें लेकिन कहीं से भी उनके मन, सोच व जज्बे से बुजुर्गियत नहीं झलकती. वह युवाओं की तरह कसरत और योगा भी करते हैं. हाईटेक टेक्नालॉजी से कदमताल करते हुए गैजेट्स भी यूज करते हैं. आइए मिलते हैं ऐसे अलग-अलग शख्सियत से, जिनसे सीख लेकर युवा सफलता की इबारत लिख सकते हैं.

लाइफ स्टाइल में युवा भी खा जाए मात

बिजनेस टाइकून माने जाने वाले उद्योग जगत में विख्यात दीनानाथ झुनझुनवाला से शायद ही कोई वाकिफ न हो. जीवन के 85 बसंत देख चुके दीनानाथ अभी भी उद्योग जगत के जरिए बनारस की शान को बरकरार रखे हुए हैं. रोजाना की मार्निग वॉक, योगा, सकारात्मक सोच और खानपान पर नियंत्रण ही उन्हें सर्वश्रेष्ठ बनाती है. देश के विभिन्न प्रांतों में 'झूला' को ब्रांड बना चुके दीनानाथ झुनझुनवाला को आज भी खाली बैठना अच्छा नहीं लगता. वक्त का सही उपयोग करने की कला को वह मूलमंत्र मानते हैं. शायद यही वजह है कि कई युवा उद्यमी आज भी उनसे सलाह-मशविरा के लिए उनके दरवाजे पर दस्तक देने आते हैं.

67 की उम्र में तीन सौ दंड-बैठक

एक युवा भी इतना एक्सरसाइज नहीं कर सकता जितना कि गया सेठ अखाड़े के संरक्षक मनोहर पहलवान रोजाना करते हैं. उम्र जरूर 67 की हो चुकी है लेकिन मन अभी भी 27 का है. मनोहर सिंह यादव आज भी सुबह-शाम तीन सौ दंड-बैठक करते हैं. यही नहीं, युवाओं के संग रस्सा भी चढ़ते हैं. उत्तर प्रदेश केशरी रहकर देश-विदेश में कुश्ती के जरिए बनारस सहित देश का नाम रोशन करने वाले इंटरनेशनल पहलवान मनोहर सिंह यादव अब बच्चों सहित युवाओं को नि:शुल्क व नि:स्वार्थ भाव से कुश्ती के दाव-पेंच सिखाते हैं. युवाओं में जोश-जज्बा भरने वाले मनोहर सिंह के कई शिष्य भारतीय रेलवे, आर्मी, उत्तर प्रदेश पुलिस सहित अनेक विभागों में कार्यरत हैं.

गैजेट्स के दोस्त हैं केएन घोष

अभी बहुत से ऐसे यंगस्टर्स हैं जो बहुत अधिक गैजेट्स के पीछे दीवाने नहीं रहते. लेकिन सुंदरपुर निवासी 77 वर्षीय केएन घोष लेटेस्ट मॉडल के स्मार्ट फोन, टैब रखना पसंद करते हैं. कहें तो एकदम दीवाने हैं. यही नहीं, बाकायदा फेसबुक-ट्विटर पर हमेशा एक्टिव रहते हैं. कोल इंडिया से रिटायर्ड ऑफिसर केएन घोष को परिवार में गैजेट्स का दोस्त भी कहा जाता है. क्योंकि इनका अधिकतर समय स्मार्टफोन पर ही गुजरता है. देश-दुनिया की खबरों पर हमेशा पारखी नजर रखना और हर नई चीज जानने के लिए उनकी क्यूरासिटी उन्हें युवाओं की तरह खास बनाती है.

बेटे-बेटियों के लिए हो गई डिजिटल

अस्सी की रहने वाली 61 वर्षीय किरन मिश्रा डिजिटल युग में कदमताल कर रही हैं. बेटियों की शादी होने के बाद उनसे जुड़े रहने के लिए व्हाट्सएप्प, फेसबुक हैंडल करना सीखा. देखते ही देखते कुछ सालों में अब बिना किसी हेल्प के किरन मिश्रा स्मार्टफोन यूज कर रही हैं. बेटियों से वीडियो चैट कर रही हैं तो व्यवसायी परिवार से जुड़े होने के नाते बेटों का कारोबार में हेल्प भी करती हैं. कोई भी पुर्जा-रसीद हो तुरंत व्हाट्सएप्प से भेजती हैं. किरन मिश्रा को देखकर अस्सी मुहल्ले में कई और लोगों ने डिजिटल की राह अपनाई है.