GORAKHPUR: नेशनल गेम हॉकी कागजों में फल-फूल रही है, लेकिन हकीकत में यहां बिना हथियार के जंग लड़कर जीतने जैसा माहौल है. नए खिलाड़ी अपनी टीम को जीत दिलाने के लिए मेहनत कर पसीना बहा रहे हैं, लेकिन जब हकीकत से उनका सामना हो रहा है तो सुविधाओं के अभाव में ढेर हो जा रहे हैं. दर्जनों इंटरनेशनल प्लेयर्स देने वाली गोरखपुर हॉकी की नर्सरी सुविधाओं के अभाव में मुरझा रही है. इसमें ग‌र्ल्स हॉकी की हालत तो और खराब है. मगर अब मुरझा रही ग‌र्ल्स हॉकी की नर्सरी फिर लहलहाती नजर आएगी. हालत को संवारने के लिए गोरखपुर के ही खिलाडि़यों ने आगे कदम बढ़ाया है.

फ्री ऑफ कॉस्ट ट्रेनिंग की पहल

गोरखपुर में खिलाडि़यों को ट्रेंड करने के लिए लिमिटेड प्लेस और सोर्स हैं. स्कूल और कॉलेजेज में तैयारियों के नाम पर कोरम पूरा कर टीम तैयार कर ली जाती है. मगर यही मायने में इन्हें हॉकी की एबीसीडी भी नहीं मालूम हो पाती. ऐसे में गोरखपुर के खिलाडि़यों को हॉकी की बारिकियां सिखाने के लिए अर्जुन अवार्ड विनर ओलंपियन प्रेम माया और हॉकी टीम इंडिया का हिस्सा रह चुकी रंजना ने पहल की है. दोनों अब गोरखपुर के खिलाडि़यों को फ्री ऑफ कॉस्ट ट्रेनिंग देंगी, जिससे हॉकी की नर्सरी और भी ज्यादा फल-फूल सके. इसके अलावा वह स्टिक और बॉल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया कराएंगी.

साई डायरेक्टर को प्रपोजल

'खेलो इंडिया स्कीम' के तहत गोरखपुर में खेल की संभावनाओं को तलाशने के लिए स्पो‌र्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) की टीम गोरखपुर पहुंची. यहां उन्होंने वॉटर स्पो‌र्ट्स के साथ ही कई और गेम्स के लिए स्पो‌र्ट्स और यूनिवर्सिटी से जुड़े जिम्मेदारों से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने रेलवे में स्पो‌र्ट्स ऑफिसर पद पर तैनात प्रेम माया से भी मुलाकात की. उन्होंने खिलाडि़यों को ट्रेनिंग देने के लिए प्रपोजल रखा तो इस पर प्रेममाया ने हामी भर दी. उनके साथ रंजना भी आगे आई और अब गोरखपुर साई का कैंप मिलने के बाद ग‌र्ल्स खिलाडि़यों के बेहतर फ्यूचर के दरवाजे खोल दिए.

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अभी भी देती हैं टिप्स

प्रेम माया का हॉकी से हमेशा जुड़ाव रहा है. वह इस खेल के लिए हरदम आगे आने के लिए तैयार हैं. यही वजह है कि सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम में हॉकी की प्रैक्टिस करने वाले बच्चों को वह रोजाना हॉकी की बारीकियां सिखाती हैं. ऑफिस टाइम खत्म होने के बाद वह कुछ वक्त बच्चों के साथ गुजारती हैं और उन्हें हॉकी की एबीसीडी बताती है. इस वक्त वहां करीब पांच दर्जन से ज्यादा बच्चे ट्रेनिंग के लिए पहुंच रहे हैं. यह प्राइवेट एकेडमी के बच्चे हैं, लेकिन फिर भी यह उन्हें बारीकियां बताने के लिए हमेशा ही तैयार रहती हैं.

वर्जन

हॉकी ने मुझे यह पहचान दिलाई है, इसके लिए मुझसे जो कुछ भी पॉसिबल हो सकेगा, वह करने को तैयार हूं. इसके लिए साई के डायरेक्टर ने मुझसे ट्रेनिंग देने के लिए पूछा था, मैंने फ्री ऑफ कॉस्ट ट्रेनिंग के लिए हामी भरी है. वहीं मेरे साथ टीम इंडिया का हिस्सा रही रंजना भी इसके लिए तैयार है.

- प्रेम माया, ओलंपियन, हॉकी इंडिया