बाल संरक्षण गृह में मासूम के साथ कुकर्म के प्रकरण में बड़ी कार्रवाई

परिसर में रह रहे एक पूर्व अधीक्षक पर मासूमों के साथ मारपीट का आरोप

Meerut. महिला कल्याण निदेशालय की टीम ने तीसरे दिन मंगलवार को मासूम के साथ हुए कुकर्म के प्रकरण में जांच पूरी कर ली है. सूत्रों के मुताबिक जिला प्रोबेशन अधिकारी समेत करीब आधा दर्जन कर्मचारी दोषी करार हुए हैं. वहीं दूसरी ओर जांच टीम ने दुष्कर्म के आरोपी जावेद पर पाक्सो समेत विभिन्न धाराओं को बढ़ाने की सिफारिश भी की है.

टीम ने पूरी की जांच

उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी मुख्यालय बीएस निरंजन और उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी सहारनपुर मंडल पुष्पेंद्र सिंह को जांच अधिकारी बनाकर बीते रविवार मेरठ भेजा गया. दोनों अधिकारियों ने 3 दिन की जांच के बाद मंगलवार को जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है.

डीपीओ समेत आधा दर्जन दोषी

सूत्रों के मुताबिक निदेशालय की टीम ने मुख्य आरोपी के अलावा जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रवण कुमार गुप्ता समेत आधा दर्जन कर्मचारियों को दोषी करार दिया है. गौरतलब है कि मुख्य आरोपी जावेद की गिरफ्तारी के बाद डीएम अनिल ढींगरा के आदेश पर तत्कालीन केयर टेकर अय्यूब हसन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन कर दिया है. हालांकि केयर टेकर को अभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है. वहीं मंगलवार को निदेशालय की टीम ने जांच के बाद पाया कि जघन्य घटनाक्रम को जानकारी के बाद भी छिपाने की कोशिश प्रोबेशन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने की. कुकुर्म के आरोपी कर्मचारी जावेद ने शराब पीकर घटना को अंजाम दिया.

मारपीट से क्षुब्ध होकर खोला मुंह

बाल संरक्षण गृह में रहने वाले पूर्व अधीक्षक कुलदीप सिंह पर बच्चों के साथ मारपीट का आरोप है. 8 जुलाई को हुए घटनाक्रम का खुलासा 21 जुलाई को निरीक्षण के दौरान प्रधान मजिस्ट्रेट प्रीति चौधरी के समक्ष मासूम ने रो-रोकर किया.

किसके आदेश पर पहुंचा मासूम?

पीडि़त मासूम की आधार कार्ड के मुताबिक 25 मई 2010 है. मई 2018 में मासूम को रामपुर स्थित शिशु सदन से मेरठ बाल गृह लाया गया. आखिर किसके आदेश पर मानकों को दरकिनार कर मासूम को मेरठ बाल गृह लाया गया? यह सवाल भी प्रोबेशन विभाग से जांच कमेटी ने किया है. कानूनन 10 साल से अधिक उम्र के अनाथ बच्चों को बाल गृह में भेजने या शिफ्ट करने के आदेश हैं जबकि मासूम की उम्र मौजूदा समय में महज 8 साल 3 माह है. कमेटी इस दिशा में भी जांच कर रही है कि आखिर शिशु सदन से मासूम को मेरठ बाल गृह क्यों लाया गया? मंगलवार टीम को पीडि़त मासूम का हेल्थ कार्ड भी नहीं मिला. पीडि़त मासूम को रानी लक्ष्मीबाई सम्मान कोष से 3 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी.

ट्रेनिंग में गए थे इंस्पेक्टर

इंस्पेक्टर नौचंदी ब्रिजेश कुमार का कहना है कि वह गत् 16 से 30 अगस्त तक ट्रेनिंग में लखनऊ गए हुए थे. इसी दौरान थाने का चार्ज एसएसआई शशि कुमार के पास था. इसी बीच यह घटना हुई. अब इस मामले की जांच एसएसआई शशि कुमार कर रहे है. एसपी सिटी रण विजय सिंह का कहना है कि जांच में नौचंदी पुलिस की लापरवाही सामने आ रही है. पाक्सो एक्ट भी बाद में लगाया गया. सारी घटना अधिकारियों से छिपाए रखी. नौचंदी पुलिस के दरोगा के खिलाफ रिपोर्ट बनाकर एसएसपी को सौंप दी है.