- फिल्म प्रोडक्शन को लेकर नहीं हुआ एक भी एमओयू साइन

- सरकार को हासिल हुए हैं केवल तीन ऑनलाइन प्रपोजल्स

- मुंबई की कंपनी सिने स्टार ने भेजा है फिल्म सिटी के लिए 100 करोड़ का प्रपोजल

देहरादून, बीती 7 व 8 अक्टूबर को आयोजित हुई प्रदेश की पहली इनवेस्टर्स समिट को सफल जरूर बताया जा रहा हो लेकिन दावे के मुताबिक फिल्म सेक्टर में सरकार फिल्म मेकर्स को इनवेस्टमेंट के लिए अट्रैक्ट कर पाने से विफल रही. फिल्म निर्माण के क्षेत्र में एक भी एमओयू साइन नहीं हो पाया. हालांकि, सरकार दावा कर रही है कि फिल्मों मे इनवेस्टमेंट के लिए 855 करोड़ रुपए के ऑनलाइन प्रपोजल्स मिले हैं. इनको स्टडी किया जा रहा है.

फिल्मों में निवेश का कोई एमओयू नहीं

इनवेस्टर्स समिट के लिए करीब एक दर्जन क्षेत्रों में पूंजी निवेश के प्रस्ताव शामिल किए गए थे. लेकिन, फिल्मों के क्षेत्र में सरकार को कुछ खास हासिल नहीं हुआ. हालांकि, सरकार ने दावे काफी किये थे, इसे लेकरर खुद सीएम मुंबई गए थे और फिल्म मेकर्स के साथ मीटिंग भी की थी. कहा जा रहा था कि फिल्मों के क्षेत्र में कई फिल्म मेकर्स उत्तराखंड का रुख करने को तैयार हैं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. फिल्म इंडस्ट्री से एक भी एमओयू इस संबंध में साइन नहीं हुआ.

पाइपलाइन 885 करोड़ के प्रपोजल

बताया जा रहा है कि इनवेस्टर्स समिट के दौरान और उसके बाद सरकार को तीन प्रपोजल मिले हैं, जिन्हे स्टडी किया जा रहा है. ये प्रपोजल फिल्म स्टूडियो, फिल्म सिटी के बताए जा रहे हैं. मुंबई की कंपनी सिने स्टार ने 100 करोड़ रुपए की फिल्म सिटी निर्माण का प्रपोजल दिया है. ऐसे ही उत्तराखंड से इस संबंध में 500 करोड़ रुपए का प्रपोजल मिला है. 85 करोड़ रुपए का एक और प्रपोजल सरकार को मिला है, लेकिन इनकी हकीकत क्या है इसको लेकर भी संशय है.

गढ़वाल-कुमाऊं में फिल्म सेंटर होंगे डेवलप

बताया जा रहा है कि पंतनगर विश्वविद्यालय के पास नैनीताल जिले में करीब 100 एकड़ की जमीन मौजूद है. जिस पर फिल्म सेंटर यानि छोटी फिल्म सिटी डेवलप किए जाने पर विचार किया जा रहा है. ऐसे ही टिहरी में भी जगह ढूंढी जा रही है. उसके बाद फिल्म के क्षेत्र में आए हुए प्रपोजल्स पर एमओयू साइन किए जा सकेंगे.

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फिल्म पॉलिसी में परिवर्तन आखिरी दौर में

फिल्म के क्षेत्र में पूंजी निवेश की संभावनाओं को देखते हुए सरकार फिल्म पॉलिसी में भी परिवर्तन की बात कह रही है. इसमें आंशिक संशोधन के तौर पर शूटिंग के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस, टैक्स में छूट और फिल्मांकन के दौरान सुरक्षा मुहैया कराया जाना प्रमुख हैं. दावा किया जा रहा है कि जल्द ही इन विभागों से मंजूरी मिलने के बाद फिल्म पॉलिसी में परिवर्तन आ जाएगा.