क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ :सिटी के कांटाटोली के पास आदिवासियों की 10 एकड़ मूल्यवान जमीन को इंडियन ऑक्सीजन पार्क ने प्लांट लगाने के लिए सरकार से लिया था, लेकिन अब उसे किराए पर देकर हर महीनें लाखों रुपए कमा रही है. 1990 में प्लांट बंद होने के बाद आईओसी ने इस जमीन को गोदाम बनाने के लिए दर्जनभर कूरियर कंपनियों को सौंप दिया. इसके एवज में वह कूरियर कंपनियों से हर माह किराया वसूल रही है. लेकिन, जिन आदिवासी रैयतों से यह जमीन ली गई थी, उन्हें एक रुपए का लाभ नहीं दे रही है. इसके उलट जमीन वापस करने की मांग कर रहे आदिवासियों को डराया-धमकाया जा रहा है.

ब्लू डार्ट , ईकाम एक्स. के गोदाम

इस जमीन पर ब्लू डार्ट और ई-काम एक्सप्रेस जैसी कूरियर कंपनियों के गोदाम हैं. इसके अलावा आवरण होम्स, टीवीएस लाजिस्टिक आदि ने भी गोदाम बना रखा है. सारे निर्माण पुराने हैं और इंडियन ऑक्सीजन कंपनी के द्वारा बनाए गए हैं. जमीन का आधा से ज्यादा हिस्सा परती रखा गया है क्योंकि जमीन हड़पने की साजिश रचने वाले लोगों को आशंका है कि सरकार कभी भी जमीन वापस ले सकती है.

20 रुपये स्क्वायर फीट किराया

किरायेदारों से मिली जानकारी के अनुसार, हर माह 20 रुपये स्क्वायर फीट से उंची दर पर किराया वसूली की जा रही है. गोदामों का साइज भी 20 हजार स्क्वायर फीट के करीब बताया जा रहा है. हालांकि, लोग खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं लेकिन आदिवासियों की जमीन को हड़पकर किराया वसूली पर उनमें भी आक्रोश है.

रैयतों को दे रहे धमकी

जमीन मालिकों ने जब इस मामले में आईओसी के अधिकारियों के साथ सम्पर्क करना चाहा तो उन्हें कोर्ट की धमकी दी गयी. जानकारों का कहना है कि जमीन मालिकों की जमीन को किराया पर लगा आईओसी रुपये कमा रहा है और उसी किराए से केस लड़ने की भी तैयारी कर रहा है.

फैक्ट्री बंद पर कब्जा बरकरार

सरकार से उक्त जमीन को हासिल करने के बाद कुछ दिन फैक्ट्री चलायी गयी लेकिन उसके बाद फैक्ट्री बंद कर दी गयी. आईओसी ने फैक्ट्री तो बंद कर दी लेकिन जमीन पर अपना कब्जा बनाए रखा. आज जमीन की कीमत करोड़ों रुपयों में आंकी जा रही है.