-बारिश के पानी से धंस गई जंक्शन बॉक्स की जमीन, करंट उतरने का मंडरा रहा है खतरा

-सिटी के कई एरिया में लगे हेरिटेज पोल के पास की जमीन में भी हुआ गड्ढा

आईपीडीएस वर्क के तहत बनारस में बिजली के तारों को अंडरग्राउंड करने का काम पूरा होने के साथ ही इसमें हुई लापरवाही भी अब उजागर होने लगी है. जिसकी वजह से इस प्रोजेक्ट को पूरा करने वाली कंपनी सवालों के घेरे में आ गई है. बनारस में हुई पहली बारिश ने आईपीडीएस वर्क की पोल खोलकर रख दी है. सिटी के जिन एरिया में आईपीडीएस के जंक्शन बॉक्स लगाए गए हैं, वहां की जमीनें बारिश के पानी को झेल नहीं पा रही हैं. जिसकी वजह से जंक्शन बॉक्स के नीचे की जमीन धंसती जा रही है. ऐसा एक नहीं दर्जनों क्षेत्र में हुआ है.

अधिकारी भी बेफिक्र

सिद्धगिरी बाग, बादशाह बाग, सिगरा, सोनिया रोड के अलावा शहर में दर्जनों ऐसे एरिया हैं जहां आईपीडीएस वर्क की हवा निकल रही है. लेकिन इससे न तो बिजली विभाग के अधिकारियों को कोई फर्क पड़ रहा है और न ही आईपीडीएस वर्क से जुड़े उन अधिकारियों को, जिन्हें इस काम के देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है. हर बार की तरह इस बार भी अधिकारियों का रटा रटाया जवाब मिला कि जहां भी कमियां मिल रही हैं उन्हें ठीक कराया जाएगा.

हेरिटेज पोल में भी झोल

बारिश के पानी का असर सिर्फ आईपीडीएस जंक्शन बॉक्स पर ही नहीं बल्कि हेरिटेज पोल के पास की जमीन पर पड़ा है. सड़क के किनारों पर हेरिटेज पोल लगाने के बाद भले ही उस जगह को पाट दिया गया, लेकिन बारिश होने के बाद वो जगह भी धंस गयी है. यहीं नहीं आईपीडीएस जंक्शन बॉक्स को जमीन से महज एक से तीन फीट की ऊंचाई पर होने के चलते जमीन में करंट दौड़ने का खतरा भी मंडरा रहा है. अगर कहीं ज्यादा जल जमाव हो जा रहा है तो उससे जमीन में कभी भी करंट पहुंच सकता है.

तो कौन लेगा जिम्मेदारी?

इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम के तहत पुरानी काशी क्षेत्र में भूमिगत किए गए केबलिंग के दौरान हुई लापरवाही का खामियाजा अब आम जनता को झेलना पड़ रहा है. जहां कहीं भी जमीनें धंसी हैं वहां करंट उतरने का खतरा भी है. इसके चलते राहगीरों को उस राह से गुजरने में सोचना पड़ रहा है. विभाग का कोई भी अधिकारी इस खामी को लेकर जिम्मेदारी नहीं ले रहा है. हर अधिकारी अलग-अलग दलील दे रहा है.

ये है योजना

बिजली विकास (आईपीडीएस) परियोजना के तहत पुरानी काशी में 16 स्क्वायर किलोमीटर इलाके में ओवरहेड तारों को अंडरग्राउंड किया जाना था. इसके लिए 431.96 करोड़ रुपए की धनराशि रिलीज की गई थी. पुरानी काशी के अलावा अन्य क्षेत्र के लिए 139.79 करोड़ दिया गया है.

आईपीडीएस वर्क में हुई खामियों को चिन्हित किया जा रहा है. जहां कहीं भी खामिया उजागर हो रही हैं उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा. रही बात काम में लापरवाही की तो इस बारे में हमें जानकारी नहीं है.

एसबी वर्मा, चीफ इंजीनियर, आईपीडीएस