20

रुपए आईआरसीटीसी वसूलता है स्लीपर क्लास के ई-टिकट पर सर्विस टैक्स

40

रुपये वसूले जाते हैं एसी क्लास का टिकट बुक कराने पर सर्विस टैक्स

80

रुपये वसूले जाते हैं स्लीपर क्लास के आई टिकट पर

120

रुपए लगते हैं एसी क्लास के लिए आई टिकट बनवाने पर

31

अगस्त तक ही प्रस्तावित थी छूट की सुविधा

कुंभ मेले में ट्रेन से पहुंचने वाले पैसेंजर्स को होगा बड़ा फायदा

31 अगस्त को समाप्त हो गयी थी सर्विस टैक्स में छूट की तिथि

balaji.kesharwani @inext.co.in

ALLAHABAD: फेस्टिव सीजन के साथ अगले साल गंगा-यमुना की रेती पर आबाद होने वाले कुंभ मेले के दौरान इलाहाबाद आने वालों को रेलवे ने बड़ा तोहफा दिया है. आईआरसीटीसी ने आनलाइन और ई टिकट बुक कराने वालों को 31 मार्च तक की मोहलत दे दी है. इस दौरान तक टिकट बनवाने वालों को सर्विस टैक्स के रूप में कुछ भी पे नहीं करना होगा. इसका फायदा दिवाली-दशहरा, छठ और होली के मौके पर यात्रा करने वाले पैसेंजर्स को भी होगा.

नोटबंदी के दौरान किया था प्रस्ताव

नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद सरकार ने डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना शुरू किया था. सरकार की इस पहल को सपोर्ट करने के लिए आईआरसीटीसी ने भी एक पहल की थी. इसने डिजिटल ट्रांजैक्शन को प्रमोट करने के लिए ई और आई टिकट बुक कराने वालों को सर्विस टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव किया था. इसके बाद पब्लिक इस तरफ डायवर्ट हुई. अब करीब 65 फीसदी रिजर्वेशन टिकट आनलाइन बुक किये जाने लगे हैं. रेलवे का लक्ष्य शत-प्रतिशत टिकट आनलाइन बनवाने का है. इसी के चलते जनरल टिकट बनवाने के लिए भी एप लांच किया जा चुका है. करीब-करीब दो तिहाई लक्ष्य हासिल कर चुकी आईआरसीटीसी ने पब्लिक के लिए छूट की अवधि छह महीने और बढ़ा दी है. यानी अब एक अप्रैल 2019 से बनने वाले आनलाइन टिकट पर ही सर्विस टैक्स वसूल किया जाएगा.

रेलवे के लिए फायदे का सौदा

2016-17 में आईआरसीटीसी को सर्विस चार्ज में छूट देने के कारण 220 करोड़ का घाटा हुआ था

2016-17 में आईआरसीटीसी को इंटरनेट टिकट ऑपरेशन से 466 करोड़ रुपए की आय हुई थी

2015-16 में आईआरसीटीसी ने 632 करोड़ रुपए कमाए थे

वर्तमान में 65 प्रतिशत तक टिकट आनलाइन बुक हो रहे हैं

रेलवे का मकसद अधिक से अधिक लोगों को डिजिटल ट्रांजेक्शन से जोड़ना है. जिसका फायदा मिल रहा है. लोग डिजिटल मोड में टिकट बुकिंग और पेमेंट कर रहे हैं. इस निर्णय से कुंभ के यात्रियों को फायदा मिलेगा.

-रितेश कुमार,

सीनियर सुपरवाइजर, आईआरसीटीसी