कहां-कहां आती है दिक्‍कत
परफार्मेंस के लिहाज से बेहतर हार्डवेयर कांबिनेशन के साथ एंड्रायड के तीनों वर्जन अपनी-अपनी जगह बेहतर हैं। हालांकि समय के साथ अपडेट हो रहे एंड्रायड में लगातार नए फीचर्स जुड़ रहे हैं, जिससे यूजर्स एक्‍सपीरियंस बेहतर होता है। पुराने स्‍मार्टफोन में ओएस अपडेट करने पर कई बार सही बैटरी बैकअप न मिलने, स्‍पेस खत्‍म होने व हैंग होने जैसी दिक्‍कत सामने आती है।

परफार्मेंस के गिरने के चांस ज्‍यादा
कोई भी एंड्रायड फोन तभी तक बेहतर चलता है, जब उसकी रैम और इंटरनल स्‍टोरेज स्‍मूथली रन करे। ऐसे में दिमाग से यह निकाल दीजिए कि ओएस अपडेट करने से फोन परफॉर्मेंस बेहतर हो जाएगी। क्‍योंकि कंपनी जब भी डिवाइस बनाती है तो उसके हार्डवेयर के हिसाब से उसका ओएस तय करती है। ऐसे में नया ओएस एक अलग हार्डवेयर कांबिनेशन के साथ मार्केट में आता है। अब अगर आप अपने पुराने हैंडसेट में नए ओएस को अपडेट करते हैं तो यह काफी हद तक फोन की परफॉर्मेंस को बढ़ाने की बजाए गिरा देता है।

ओएस अपडेट करना है एक खतरा :- एक्‍सपर्ट की राय मानें तो पुराने फोन में नया ओएस अपडेट करना किसी बड़े रिस्‍क से कम नहीं है। आइए जानते हैं इससे क्‍या-क्‍या हो सकते हैं खतरे....

1. कभी-कभी नया ओएस आपके पुराने हैंडसेट से मैच नहीं कर पाता है। जिसके चलते यह रैम को क्रैश कर देता है और आपको फोन डेड हो सकता है।

2. नए ओएस को अपडेट करने में सबसे बड़ा खतरा फोन मेमोरी का होता है।

3. कभी-कभी ओएस को अपडेट करने में घंटो लग जाते हैं। ऐसे में फोन बैटरी में काफी समस्‍या आ सकती है।

4. नए ओएस अपडेट करते समय कई बग्‍स क्रिएट हो जाते हैं।

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