एनसीए में होगा यो-यो टेस्ट
नई दिल्ली (जेएनएन)। सीमित ओवर क्रिकेट में भारतीय टीम के उप कप्तान रोहित शर्मा का यो-यो टेस्ट का ड्रामा जारी है और अब वह बुधवार को बेंगलुरु के एनसीए में फिटनेस टेस्ट देने के लिए तैयार हैं। रोहित के 16.1 के क्वालीफाइंग मार्क को हासिल नहीं कर पाने की स्थिति के लिए टेस्ट टीम के उप कप्तान अजिंक्य रहाणे को स्टैंड बाई के रूप में तैयार रहने को कहा गया है क्रिकेट संचालन टीम के साथ काफी नजदीकी से काम कर चुके बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, 'स्टैंड बाई के रूप में किसी भी खिलाड़ी को रखने में कुछ भी नया नहीं है। यदि जरूरत पड़ती है तो रहाणे को रिजर्व ओपनर के रूप में देखा जा सकता है और वह यह भूमिका निभाएंगे। अभी तक हमने नहीं सुना है रोहित के साथ फिटनेस को लेकर कोई समस्या है।

रोहित इंग्लैंड जाकर देना चाहते थे फिटनेस टेस्ट
अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच खेलने वाली टीम के खिलाडि़यों को छोड़कर भारत की सीमित ओवर की पूरी टीम का 15 जून को एनसीए में यो-यो टेस्ट लिया गया था और तब रोहित इस टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं थे। रोहित तब एक घड़ी की कंपनी के ब्रांड एंबेसडर के रूप में रूस में थे और उन्होंने बीसीसीआई से 15 जून को इस टेस्ट में शामिल नहीं होने के लिए अनुमति ली थी। हालांकि, तब से यह बात स्पष्ट नहीं हो पा रही थी कि रोहित के फिटनेस टेस्ट की तारीख को लगातार क्यों बदला जा रहा है। कप्तान विराट कोहली के अलावा वनडे में रोहित भारतीय टीम के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं और आगामी इंग्लैंड दौरे पर उनके सीमित ओवरों में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है। बीसीसीआई से जुड़े सूत्र ने बताया कि रोहित असल में इंग्लैंड पहुंचने के बाद फिटनेस टेस्ट देना चाहते थे, लेकिन बीसीसीआई ने उन्हें कहा कि इस टेस्ट को भारत में देना अनिवार्य है।

क्या होता है 'यो-यो टेस्ट'
पिछले कई सालों से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने टीम इंडिया के सभी खिलाड़ियों के लिए यो-यो टेस्ट अनिवार्य कर दिया है। यह टेस्ट खिलाड़ियों की फिटनेस और लचीलेपन को परखने के लिए किया जाता है। यह बीप टेस्ट का एडवांस वर्जन है जिसमें 20-20 मीटर की दूरी पर दो लाइनें बनाकर कोन रख दिए जाते हैं। एक छोर की लाइन पर खिलाड़ी को पैर पीछे की ओर रखना होता है और बीप बजते ही दौड़ लगानी होती है। हर मिनट के बाद गति और बढ़ानी होती है और अगर खिलाड़ी वक्त पर लाइन तक नहीं पहुंच पाता तो उसे दो बीप्स के भीतर लाइन तक पहुंचना होता है। अगर वह ऐसा करने में नाकाम होता है तो उसे फेल माना जाता है। बीसीसीआई ने इस टेस्ट को पास करने के लिए मानक अंक 19.5 रखा है।

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