IRNSS-1I के साथ NavIC सिस्‍टम का 7वां सैटेलाइट धरती की कक्षा में स्‍थापित

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज सुबह 4 बजकर 4 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से आईआरएनएसएस -1 आई नेविगेशन सैटेलाइट का अंतरिक्ष में सफल प्रक्षेपण किया। PSLV-C41 रॉकेट द्वारा लॉन्‍च के करीब 20 मिनट बाद यह नेवीगेशन सैटेलाइट रॉकेट से अलग होकर धरती की कक्षा में सेट हो गया। करीब 1425 किलो वजनी यह सैटेलाइट भारत के सैटेलाइट मैप और नेवीगेशन सिस्‍टम NavIC को पूरा करने वाला पहला और आखिरी सैटेलाइट है।

अंतरिक्ष में भारत की बड़ी कामयाबी,irnss-1i सैटेलाइट लॉन्‍च के साथ पूरा हुआ navic सिस्‍टम,होंगे ये फायदे

बता दें कि इसरो ने नाविक सिस्‍टम का पहला सैटेलाइट IRNSS-1A 1 जुलाई 2103 को लॉन्‍च किया था, लेकिन वो सफल नहीं हो सका। इसके बाद नाविक सिस्‍टम के सभी 6 सैटेलाइट सफलतापूर्वक धरती की कक्षा में स्‍थापित हो गए, लेकिन नाविक सीरीज का पहला सैटेलाइट IRNSS-1H के रूप में 31 अगस्‍त 2017 को फिर से लॉन्‍च किया गया, लेकिन रॉकेट की हीटशील्‍ड ठीक ढंग से अलग न हो पाने के कारण वो सैटेलाइट मिशन भी फेल हो गया। अब जाकर इसरो ने IRNSS-1A और फिर IRNSS-1H की नया अवतार IRNSS-1I आज 12 अप्रैल को फिर से लॉन्‍च किया और वो सफल रहा। इस तरह से भारत का NavIC सैटेलाइट नेवीगेशन सिस्‍टम अपने 7 सैटेलाइट समूह के साथ अब जाकर पूरा हो गया है।

खास बात यह है कि यह नेविगेशन सैटेलाइट पूरी तरह से स्वदेशी टेक्‍नोलॉजी से बनाया गया है। इसरो के लिए ये सैटेलाइट बेंगलुरु की कंपनी 'अल्फ़ा डिज़ाइन टेक्नोलॉजी' ने बनाकर तैयार किया है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि भारत और इसरो ने पहली बार निजी क्षेत्र की कंपनियों के सहयोग से अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी पायी है।

क्या है नाविक (NavIC) सिस्‍टम?

भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम NavIC, जिसका मतलब संस्कृत या हिंदी भाषा में नाविक "या" नेविगेटर से होता है, दरअसल यह भारत की एक स्वायत्त क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली है। यह सिस्‍टम भारत और आसपास के इलाके की सटीक, रियल टाइम लोकेशन और टाइमिंग सर्विस प्रदान करता है। NavIC सिर्फ भारत को ही नहीं बल्कि आसपास के कई देशों को भी कवर करता है। यह भारत के चारो ओर करीब 1,500 किमी (930 मील) के दायरे में काम करता है। इस नेवीगेशन सिस्‍टम को चलाने के लिए 7 उपग्रहों का एक पूरा समूह काम करता है और जमीन पर मौजूद दो अतिरिक्त उपग्रह स्टैंड-बाय मोड में होते हैं। फिलहाल नाविक सिस्‍टम के 7 सैटेलाइट स्‍पेस में पहुंचकर अपना काम करना शुरु कर चुके हैं, हालांकि नाविक सैटेलाइट समूह को भविष्‍य में 7 से 11 उपग्रह तक पहुंचाने की योजना है

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क्‍या होंगे फायदे

नाविक सिस्‍टम द्वारा भारत खुद ही बिना किसी विदेशी सैटेलाइट की मदद के अपने लिए सैटलाइट मैपिंग तैयार करने, समय का बिल्कुल सही पता लगाने, जमीनी नेविगेशन की सटीक जानकारी जुटाने के साथ ही समंदर में भी नेवीगेशन का बेहतर उपयोग कर पाएगा। इन सभी तकनीकी विशेषताओं के कारण नाविक सिस्‍टम हमारी सेनाओं के साथ साथ आम लोगों की जिंदगी को भी आसान बनाने में मदद करेगा। (एजेंसी इनपुट सहित)


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