पका पकाया भोजन खिलाने का दिखाया था सपना, नाश्ता तक नहीं मिल रहा

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ALLAHABAD: इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के हास्टल्स में न्यू एकेडमिक सेशन 2018-19 में जल्द प्रवेश मिलना मुश्किल लग रहा है. ऐसे में अन्त:वासियों को इस शैक्षिक सत्र में भी हास्टल्स में खाना मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही. कारण की अभी तक इसे लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं है. जबकि, पिछले वर्ष से ही सभी हास्टल के अन्त:वासियों को विवि की ओर से की जाने वाली व्यवस्था के तहत खाना परोसने की प्लानिंग है.

बना था मीनू, तय किया था रेट

गौरतलब है कि लास्ट ईयर हास्टल वॉशआउट को लेकर हुए भारी बवाल के बाद एयू एडमिनिस्ट्रेशन ने अन्त:वासियों से वादा किया था कि वह हास्टल में मेस का संचालन शुरू कराएगा. इसके लिए प्रॉसेस भी की गई और दिन रात के भोजन का मीनू भी बनाया गया. अन्त:वासियों के लिए सुबह के नाश्ते के साथ दोपहर और रात्रि के भोजन की व्यवस्था का रेट तय किया गया. लेकिन बात वहां जाकर अटक गई कि हास्टल्स में जिसे भी यह काम सौंपा जाएगा. उसे पैसे का भुगतान कौन और कैसे करेगा?

खाना पकाते बीत गया साल

लास्ट इयर हास्टल्स में भोजन की व्यवस्था का सब्जबाग दिखाकर ही दो गुने तक हास्टल की फीस भी तय कर दी गई थी. कहा गया था कि हास्टल्स की फैसेलिटी चाहिए तो फीस तो बढ़ानी ही पड़ेगी. बहरहाल, अन्त:वासी पके पकाए भोजन का सपना ही देखते रहे और खुद के हाथों से ही भोजन पकाते उनका साल बीत गया. कुछ वैसी ही स्थिति इस बार भी है. सितम्बर आ चुका है और अभी हास्टल के लिए फार्म ही भरवाए जा रहे हैं. ऐसे में मेस की बात भला कौन और कैसे करे?

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हास्टल्स में प्राईवेट में मेस का संचालन किया जा रहा है. छात्रों को इसका जुगाड़ खुद से बनाना पड़ता है. ज्यादातर छात्र या तो एक टाईम ही खाते हैं या खुद खाना पका लेने के भरोसे रहते हैं.

अमित

प्राईवेट में चल रही मेस में गुणवत्ता नाम की कोई चीज नहीं है. बस छात्र खाना पकाने वालों के भरोसे ही जैसे तैसे खा पीकर जी रहे हैं. विवि की ओर से इसके निरीक्षण तक की कोई व्यवस्था नहीं है.

अंगद

विवि ने सब्सीडी पर मेस के संचालन की बात की थी. लेकिन ठेके पर भी यह काम नहीं शुरू हो सका. इससे पता चलता है कि एडमिनिस्ट्रेशन की कथनी और करनी में कितना बड़ा फर्क है.

सिद्धार्थ

हास्टल्स में कोई फैसेलिटी नहीं दी जा रही. न कल्चरल एक्टिविटी न ही कोई स्पोर्ट्स इवेंट आदि. जबकि फीस सबकी ली जाती है. कम से कम विवि को भोजन की व्यवस्था तो नए शैक्षिक सत्र में हर हाल में करनी चाहिए.

विभा