45 हजार से अधिक सीएनजी वाहन शहर में

25 हजार से अधिक प्राइवेट सीएनजी कारें

7 हजार से अधिक टैक्सी

4.5 हजार सीएनजी ऑटो

800 सीएनजी बसें

3 हजार स्कूली वैन

2 सौ सीएनजी टैम्पो

कितनी है क्षमता

- राजधानी में मौजूद सीएनजी फिलिंग स्टेशनों से 2,25,000 केजी गैस रोजाना भरी जा सकती है.

- इस समय रोजाना 1,30,000 केजी गैस की खपत राजधानी में है.

- पेट्रोल और डीजल के वाहनों की तुलना में लगातार कम हो रही सीएनजी वाहनों की डिमांड

- सीएनजी रिफिलिंग सेंटर्स पर लगने वाली लाइन को देख लोग कर रहे इन वाहनों से किनारा

sanjeev.pandey@inext.co.in

LUCKNOW: सीएनजी फिलिंग स्टेशन पर लगने वाली लंबी लाइनों को देखकर लोग सीएनजी (कम्प्रेस नेचुरल गैस) से चलने वाले वाहनों से दूरी बना रहे हैं. इस साल दुर्गा पूजा और धनतेरस पर हुई वाहनों की सेल को देखें तो पता चलता है कि इस दौरान सीएनजी से चलने वाले वाहनों की सेल न के बराबर हुई है. वहीं पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों की खूब बिक्री हुई है. ऐसे में तय है कि राजधानी में बढ़ी डीजल और पेट्रोल वाहनों की संख्या के कारण वायु प्रदूषण में और भी इजाफा होगा.

नहीं मिल रहा प्रोत्साहन

सीएनजी के दाम पेट्रोल से कम हैं और इससे प्रदूषण भी कम फैलता है, इसके बाद भी इन वाहनों की संख्या में लगातार गिरावट आती जा रही है. इसका प्रमुख कारण यह है कि लोगों को सीएनजी लेने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है. वहीं इसे लेकर लोगों को जागरुक भी नहीं किया जा रहा है. बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए इन वाहनों की खरीद पर प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए, लेकिन प्रशासनिक अमले की ओर से इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

सरकार का ध्यान ही नहीं

राजधानी दिल्ली और देश के कई राज्यों में सीएनजी वाहनों को प्रोत्साहन देने के लिए काफी काम किया जा रहा है. पर्याप्त मात्रा में बिना किसी दिक्कत के लोगों को सीएनजी उपलब्ध कराई जा रही है. वहीं अगर अपने शहर की बात करें तो यहां सीएनजी की उपलब्धता बढ़ने की जगह कुछ स्टेशन तो बंद ही हो गए हैं.

2006 में हुई थी शुरुआत

राजधानी में जब 2006 में सीएनजी स्टेशनों की शुरुआत हुई थी तो उस साल 2500 से अधिक गाडि़यां रजिस्टर्ड हुई थीं. हर तरफ सीएनजी वाहनों की डिमांड बढ़ रही थी. लेकिन सीएनजी की किल्लत से लगातार ऐसे वाहनों की संख्या में गिरावट आ रही है.

प्राइवेट वाहनों से दूर

शहर में सभी कामर्शियल वाहनों का संचालन सीएनजी से करने का निर्देश है. ऐसे में ऑटो, टैंपो, बसें और रेडियो टैक्सी सभी सीएनजी से चल रही हैं. शहर में आठ हजार से अधिक कार टैक्सी हैं. यह भी सीएनजी से चलाई जा रही हैं. प्राइवेट सीएनजी गाडि़यों की बात करें तो मात्र 35 हजार वाहन सीएनजी हैं.

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शहर में सीएनजी स्टेशन और रिफिलिंग कैपेसिटी

मदर स्टेशन कैपेसिटी

1. नादरगंज- 45,000 केजी

2. गोमती नगर- 30,000 केजी

3. यूपीएसआरटीसी- 15000 केजी

4. वृंदावन योजना सेक्टर-6- 35000 केजी

5. वृंदावन योजना सेक्टर-18- 20,000 केजी

6. इंदिरा ऑटो - सेक्टर-के, आशियाना- 15,000 केजी

7. त्रिकुटा फिलिंग स्टेशन- बुद्धेश्वर चौराहा- 10,000 केजी

डॉटर बूस्टर स्टेशन-

8. कोको- गोमती नगर

9. वर्मा ऑटो- इंजीनियरिंग कॉलेज के पास

(दोनों की 4-4 हजार केजी गैस रिफिलिंग की क्षमता)

फिलिंग स्टेशन जो बंद हैं

स्टेशन कैपेसिटी

1. स्टैंडर्ड फिलिंग स्टेशन-मडि़यांव-डॉटर बूस्टर स्टेशन-4000 केजी

2. साकेत फिलिंग स्टेशन- चिनहट- 10,000 केजी

3. अनुराग फिलिंग स्टेशन-पीजीआई-10,000 केजी

4. प्रकाश ऑटो- बीबीडी के पास

(ग्रीन गैस लिमिटेड के अधिकारियों के अनुसार पिछले सवा साल में 9 रिफिलिंग सेंटर्स की शुरुआत हुई है.)

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लगातार कम होती गई सेल

साल 2006 में सीएनजी से चलने वाली कारों की संख्या करीब 2500 के आसपास थी. वहीं वर्ष 2007 में यह बढ़कर तीन हजार से अधिक हो गई. लेकिन इसके बाद सीएनजी से चलने वाले वाहनों की खरीद को लेकर लोगों का रुझान कम होने लगा. आज आलम यह है कि इस साल दुर्गा पूजा के दौरान 5363 बिके दो पहिया और 2232 चार पहिया वाहन बिके. इनमें से केवल 11 कारें ही सीएनजी से चलने वाली हैं. इसी तरह धनतेरस में 3500 कारें पेट्रोल और 1500 कारें डीजल से चलने वाली बिकी हैं. हैरत की बात यह है कि धनतेरस में एक भी सीएनजी वाहन की सेल नहीं हुइ है.

कोट

त्योहार के मौसम में पेट्रोल और डीजल वाहनों पर छूट मिलती है. जिसके कारण वे काफी संख्या में बिकते हैं. रही बात सीएनजी स्टेशनों पर लाइन की तो आज राजधानी में 17 सीएनजी रिफिलिंग सेंटर रन कर रहे हैं. जल्द ही दो और खोले जाने की तैयारी है.

जिलेदार, एमडी

ग्रीन गैस लिमिटेड

दिवाली पर ऑपर्स के चलते पेट्रोल और डीजल वाली गाडि़यों की काफी सेल हुई है, लेकिन सीएनजी वाहनों का रजिस्ट्रेशन लगातार कम होता जा रहा है. जिन लोगों को शहर के अंदर वाहन चलाने हैं, उन्हें सीएनजी वाहनों को प्राथमिकता देनी चाहिए.

राघवेंद्र सिंह, एआरटीओ प्रशासन

लखनऊ