-जलकल विभाग के जूनियर इंजीनियर्स के फील्ड में न जाने की शिकायतों में हुआ इजाफा

- लाख कवायद के बाद भी शहर में पेयजल व सीवर की समस्या का नहीं हो पा रहा समाधान

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VARANASI

Case-1

कुछ महीने पहले नगवां में बार-बार शिकायत करने के बाद भी पेयजल की समस्या दूर न होने पर इस एरिया के जेई से पब्लिक की झड़प हो गई थी. किसी तरह से मामला संभला.

Case-2

जुलाई में मध्यमेश्वर वार्ड में सीवर की प्रॉब्लम दूर न होने पर आक्रोशित लोगों ने एरिया के जेई को बंधक बना लिया था. अफसरों के समझाने पर लोग माने.

Case-3

करीब एक हफ्ते पहले सीवर की प्रॉब्लम दूर करने को लेकर लक्सा वार्ड के पार्षद और जूनियर इंजीनियर के बीच मारपीट हो गई थी. इसमें दोनों पक्षों की ओर से लक्सा थाने में केस भी दर्ज कराया गया है.

ये तीनों केसेज तो महज उदाहरण भर हैं. फैक्ट यह है कि जलकल के जूनियर इंजीनियर्स और टेक्निकल स्टाफ की कार्यप्रणाली से जुड़ी शिकायतें बढ़ती जा रही हैं. इससे शहर में पेयजल और सीवर की प्रॉब्लम खत्म होने का नाम ले रही हैं. खुद नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने औचक जांच में कई जूनियर इंजीनियर्स की लापरवाही पकड़ी थी और जलकल के जीएम को डेली वर्क रिपोर्ट देने का निर्देश दे रखा है. इसके बाद भी जेई की मनमानी कायम है.

छोटी समस्या में भी देते हैं झेला

शहर में सीवर और पेयजल से जुड़ी प्रॉब्लम्स काफी बढ़ गई हैं. दरअसल, इससे जुड़ी शिकायत करने के लिए जलकल का कंट्रोल रूम बना है. शिकायत करने के बाद जेई को मौके पर पहुंचकर प्रॉब्लम दूर करानी होती है, लेकिन 40 फीसदी शिकायतों में जेई मामूली प्रॉब्लम दूर कराने में भी काफी समय लगा देते हैं. यानी, जो समस्या 24 घंटे में दूर होनी चाहिए, उसे दूर कराने में भी दो से चार दिन तक लग जाते हैं.

अफसरों का फरमान बेअसर

पब्लिक को शुद्ध पानी चाहिए. सीवर लाइन साफ रहे. जलकल व नगर निगम के अफसरों समेत कमिश्नर, डीएम इसकी समीक्षा भी करते रहते हैं. लेकिन कई मामलों में अफसरों का फरमान अनसुना कर दिया गया. यही नहीं, जूनियर इंजीनियर्स की कार्यप्रणाली की शिकायतें आईजीआरएस पर भी की गई हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. पिछले दिनों बनारस आए प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना के सामने भी पार्षद व पि1ब्लक शिकायत दर्ज करा चुके हैं.

इन एरिया में कम नहीं हो रही शिकायतें

- जलालीपुरा

- कच्ची बाग

- कज्जाकपुरा

- कोनिया

- नगवां

- जगतगंज

- सुंदरपुर

- लहरतारा

- महमूरगंज

-चंदुआ छित्तूपुर

- निराला नगर

- माधोपुर

- कतुआपुरा

- नरिया

- भदैनी

- लल्लापुरा

- तुलसीपुर

- पितरकुंडा

- नई बस्ती

- रामापुरा

- जैतपुरा

- मदनपुरा

- रेवड़ी तालाब

- सिकरौल

- भोजूबीर

- हुकुलगंज

- पांडेयपुर

एक नजर

12

जूनियर इंजीनियर हैं जलकल में

90 से 120

शिकायतें सीवर से जुड़ी आती हैं डेली

50 से 70

शिकायतें पेयजल से जुड़ी आती हैं रोज

50

फीसदी मामलों में जेई के मौके पर न पहुंचने की शिकायत

150

से ज्यादा शिकायतें दो महीने में आईजीआरएस पोर्टल पर

वर्जन--

जलकल के इंजीनियर्स के कार्य की डेली प्रोग्रेस रिपोर्ट बनती है. जूनियर इंजीनियर्स की कार्यप्रणाली की शिकायतें आती हैं तो उनको सख्त चेतावनी दी जाती है. अगर फिर भी रवैये में सुधार नहीं आता तो विभागीय कार्रवाई भी होती है.

रघुवेन्द्र कुमार, सचिव, जलकल