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JAMSHEDPUR: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के निधन पर शहर के विभिन्न लोगों ने पूर्व प्रधानमंत्री के साथ बिताए गए पलों को साझा किया. पूर्व प्रधानमंत्री इतने सरल और सौम्य थे जो भी उनसे मिलता उनका दीवाना हो जाता था. शहर के लोगों ने अटल जी से जुड़े संस्मरण यादों को ताजा किया.

शशांक ने भी किया था वाजपेयी जी का इलाज

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के इलाज में शहर के डॉ. शशांक काले भी शामिल है. शशांक एम्स में न्यूरो विभाग के प्रमुख हैं. सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष भरत वसानी ने बताया कि इससे पहले जब वाजपेयी जी को न्यूरो की समस्या हुई थी. तो शशांक ने उनका इलाज किया था.

रात भर रहे थे अटल जी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी लौहनगरी से जुड़ी स्मृतियों की लंबी लिस्ट हैं. भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंडल अध्यक्ष और राज्य कार्यसमिति के सदस्य रहे अनिल श्रीवास्तव याद करते हैं करीब 32-33 साल पहले टेल्को कॉलोनी में रोड नंबर एक में शास्त्री जी की बेटी की शादी में आम लोगों की तरह रातभर अटल जी रहे थे.

दीनानाथ को रेडियो पर नाम लेकर वाजपेयी ने बुलाया था

पूर्व प्रधानमंत्री ने रेडियो से संदेश देकर पूर्व विधायक दीनानाथ पांडेय को बिहार में मिलने के लिए बुलाया था. दीनानाथ जी कहते है कि वे कहने लगे कि अब उम्र 84-85 वर्ष की हो गई है. 1979 में जब दंगा हुआ था तो वाजपेयी जी बिहार के एक होटल में ठहरे थे. उस समय लैंडलाइन फोन इक्का दुक्का घर में हुआ करता था. तब ऑल इंडिया रेडियो में हुए एक प्रसारण के माध्यम से उन्हें पता चला कि वाजपेयी जी ने उन्हें बिहार में मिलने के लिए बुलाया है. तब वे पार्टी के एक अधिकारी अश्विनी कुमार के साथ वाजपेयी जी से मिलने के लिए बिहार गए थे.

अटल जी का ऐसा अंदाज,जब ऑल इंडिया रेडियो पर नाम लेकर पार्टी कार्यकर्ता को मिलने बुलाया

शैलेंद्र व कृष्णा शर्मा दिल्ली रवाना

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी निधन पर शोक व्यक्त करते हुए राज्य 20 सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के सदस्य शैलेंद्र सिंह एवं भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष कृष्णा शर्मा उर्फ काली, मंडल अध्यक्ष अभय चौबे ने कहा कि अटल की प्रेरणा, उनका मार्गदर्शन, हर भारतीय को, हर भाजपा कार्यकर्ता को हमेशा प्रेरित करती रहेगी. तीनों भाजपा नेता अटल के अंतिम दर्शनों के लिए गुरुवार को टाटानगर रेलवे स्टेशन से राजधानी एक्सप्रेस से नई दिल्ली के लिए रवाना हुए.

लोगों में भरा था विश्वास

वह समय था जब पूरे देश में उथल-पुथल मची हुई थी. जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर छात्र समुदाय आंदोलित हुआ था. तत्कालीन केंद्र सरकार की ओर से देश में आपातकाल लागू किए जाने के बाद चारों तरफ गुस्से का आलम था. शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोरंजन दास याद करते हैं वह समय जब आपातकाल समाप्त होने के बाद अटल जी शहर आए थे. स्मृतियों को टटोलते हुए मनोरंजन दास बताते हैं- 1977-78 में जनता पार्टी की सरकार गठित हो चुकी थी. अटल जी शहर आए तो छात्रों के बड़े समूह के बीच घिरे रहे. छात्र उन्हें लेकर साकची बसंत टॉकीज के पास पहुंचे जहां जेपी आंदोलन के दौरान तीन छात्र पुलिस की गोली से मारे गए थे. उस जगह को शहीद स्थल कहा जाता था.

एके सरकार के घर पर ठहरते थे वाजपेयी

पूर्व प्रधानमंत्री सह जनसंघ के संस्थापक में से एक अटल बिहारी वाजपेयी जब भी जमशेदपुर आते वह प्रख्यात अधिवक्ता व जनसंघ के संस्थापक स्व. अशोक सरकार के साकची स्थित आवास पर ही ठहरते थे. यह जानकारी स्व. अशोक सरकार के पुत्र अधिवक्ता उदित सरकार ने दी. उदित सरकार कहते हैं कि जब मैं 1971-72 में जब अटल बिहारी वाजपेयी जमशेदपुर के बारी मैदान में सभा किया. उसके बाद वह वापस हमारे घर आए. जब वह बाथरूम फ्रेश होने के लिए गए तो मैं बाहर में तौलिया लगाकर खड़ा रहता था. उदित सरकार कहते हैं कि 1979 जब अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री थे और शहर में दंगा हुआ था तब जहाज से आए थे. दंगा प्रभावित इलाके का भ्रमण कर जाते समय मेरे घर पर आए थे. थोड़ी देर तक फ्रेश होकर चाय पीए और उसी दिन साउथ बिहार एक्सप्रेस से रवाना हो गए. पुराने समय को याद करते हुए अधिवक्ता उदित सरकार कहते हैं कि जब भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी घर पर बैठक करते या बाहर से आते तो उनके पास काफी माला जमा रहता था. वह मुझे देखते ही गले में माला डाल देते. मैं भी उस समय माला पहनकर काफी इतराता था. उदित सरकार कहते हैं कि एक बार तो डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, लाल कृष्ण आडवानी व अटल बिहारी वाजपेयी एक बार आए और बैठक कर संवाददाता सम्मेलन किए. उस समय का टेबल आज भी मौजूद है. जिसपर काम होता है. जिस उपरी कमरे में अटल विहारी वाजपेयी ठहरा करते थे, वह कमरा आज बंद पड़ा हुआ है.

सिद्धांतों से समझौता नहीं करने की मिली सीख

जुगसलाई निवासी महेश चंद्र शर्मा कहते हैं कि भारत रत्‍‌न अटल बिहारी वाजपेयी वाक कला में निपुण थे. उनसे कई तरह की सीख मिली. उनका कहना था कि समय पर रहो, अनुशासित रहो, विपरीत परिस्थिति में विचलित न हो, धैर्य धारण करो और सतत कर्म करते रहो. महेश चंद्र शर्मा बताते हैं कि कार्यकर्ताओं ने जो उनसे सीखा उनमें सबसे महत्वपूर्ण था सत्ता प्राप्ति के लिए सिद्धांतों से किसी प्रकार का समझौता नहीं करना. महेश चंद्र शर्मा ने बताया कि उनके आदर्शो पर चलकर ही उन्होंने लगातार लंबे समय तक पार्टी का प्रतिनिधित्व किया.

लोगों को पसंद थी सादगी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बेहद सादे तबियत के नेता थे. लोगों को उनकी सादगी बेहद पसंद आती थी. उन्हें देख कर या उनसे मिल कर नहीं लगता था कि वो इतने महान नेता हैं. ये बातें जनसंघ के नेता टेल्को निवासी जयनारायण सिंह ने बताई. जयनारायण सिंह अटल बिहारी वाजपेयी के बेहद करीबी थी. जयनारायण बताते हैं कि 1970 में अटल बिहारी वाजपेयी जमशदेपुर आए थे और यहां बांग्लादेश में चल रहे आंदोलन पर मंथन हुआ था.