क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : झारखंड चैंबर चुनाव की तारीख आने के साथ सरगर्मी तेज होती जा रही है. टीम मारू और टीम आरडी सिंह ने जहां अपनी जीत की खातिर सारी ताकतें झोंक दी है, वहीं अंदर ही अंदर सेटिंग-गेटिंग का भी सिलसिला चल रहा है. दोनों ही टीमों को यह भली-भांति अहसास है कि उनके उम्मीदवार मजबूत होने पर ही उनकी जीत सुनिश्चित हो पाएगी. खैर, यह तो चुनाव परिणाम आने पर ही पता चलेगा, लेकिन चुनावी रणनीति तैयार करने में दोनों ही टीम जी-जान से जुटी हुई है. उन्होंने अपने एजेंडे तय कर लिए हैं, जिनके भरोसे वे मतदाताओं को अपने पक्ष में गोलबंद करने की तैयारी में हैं. इस सिलसिले में दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने दीपक मारू से कारोबारियों के हित व राज्य के विकास के परिपेक्ष्य में सीधी बात की.

सवाल : चैंबर के पिछले कुछ चुनावों में अनुभवी सदस्यों ने कम दिलचस्पी दिखाई है. ऐसा क्यों?

जवाब- देखिए, चैंबर चुनावों में सीनियर्स का हमेशा साथ मिलता रहा है. चैंबर की मीटिंग्स में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है. हालांकि, यह भी सच है कि बीते कुछ सालों से अंडर- 50 के व्यवसायियों ने चैंबर चुनावों में दिलचस्पी दिखाई है. फिर भी हर कंडीडेट को अनुभवी चेंबर सदस्यों का आशीर्वाद मिला है.

सवाल : चैंबर चुनाव आखिर इतना खर्चीला क्यों होता जा रहा है?

जवाब- इस बार चुनावों में बहुत सी बंदिशें चुनाव कमेटी ने लगाई हैं. सोशल मीडिया पर प्रचार की लिमिट तय कर दी गई है. मतदान केंद्रों पर प्रचार सामग्री नहीं बांटे जा सकेंगे. इतना ही नहीं, लगातार इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि चैंबर चुनाव पर होने वाले खर्च को कैसे कम किया जाए.

सवाल - व्यवसायियों और उद्यमियों के हितों के लिए आपने क्या एजेंडा बनाया है ?

जवाब:- आज झारखंड में उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि किसी भी काम के लिए कई दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं. सरकार का सिंगल विंडो सिस्टम आज भी प्रॉपर वे में काम नहीं कर रहा है. हमारे एजेंडे में इसे प्रमुखता से स्थान दिया जाएगा. हम सिंगल विंडो सिस्टम को दुरूस्त करवाने की दिशा में काम करेंगे ताकि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की परिकल्पना को साकार हो. इसके अलावा ट्रांसपोर्ट व उद्योग जैसे विभागों में सिंगल विंडो सिस्टम चालू करना भी एजेंडे में है.

सवाल - स्मार्ट सिटी को लेकर झारखंड चैंबर की कैसी भूमिका होगी?

जवाब: हमारी सोच है कि बंगाल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड को मिलाकर एक इस्टर्न जोन के डेवलपमेंट की कार्ययोजना तैयार की जाए. क्योंकि ये इलाका खनिज संपदा से भरपूर है. इन प्रदेशों में उद्योगों की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए नीति बनाएंगे. इसके अलावा स्मार्ट सिटी में चैंबर को दो एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की मांग सरकार से की जाएगी, ताकि वहां ट्रेड आर्ट एग्जीबिशन सेंटर बना सकें. हमारी सोच है कि स्मार्ट सिटी में 5-6 कांफ्रेंस हॉल का भी निर्माण हो ताकि उद्यमियों को एक ही जगह सारी सुविधाएं उपलब्ध हो सके. वहां एक मेगा स्किल सेंटर बनाने की जरूरत है जिसे हम पूरा करेंगे. इसके अलावा ट्रांसपोर्ट नगर जैसे ऐजेंडे पर भी काम करना है.

सवाल - चैंबर छोटे व्यापारियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देता, इससे कितना इत्तेफाक रखते हैं?

जवाब- मैं इन बातों से इत्तेफाक नहीं रखता हूं. शुरु से ही होल्डिंग टैक्स, निगम की दुकानों के किराए में वृद्धि, प्लास्टिक जैसे मुद्दों पर चैंबर ने व्यवसायियों का पक्ष सरकार के सामने रखा है. इतना ही नहीं व्यवसाय को लेकर सरकार की गलत नीतियों का भी विरोध करते रहे हैं. आगे नीतियां और ज्यादा पारदर्शी होंगी, इस बात की गारंटी देता हूं.